नई दिल्ली : राजस्थान की गहलोत सरकार अक्सर अपने राज्य को लेकर तमाम दावे और वादे करते रहते है, लेकिन जब कोई नाकामी हासिल होती है, तो उसका ठिकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते है। लेकिन इस बार राजस्थान से हृदय को विचलित करने वाली ऐसी घटना सामने आई है, जिसे पढ़कर आपकी रूह कांप जायेगी। कैसे 21 वीं सदी में भी लोग पानी-पानी के लिए तड़प-तड़प कर मर रहे है। वहीं जिन सरकारों पर अपनी जनता का ख्याल रखना का दायित्व है, वो ऐसी घटना पर बिना किसी लाज-शर्म के छिपते हुए नजर आते है और खुद को बचाने की कोशिश करता है।
गौरतलब है कि इस समय कोरोना के कारण अधिकतर प्रदेशों में लॉकडाउन लागू है, जिसे सिलसिलेवार तरीके से हटाया जा रहा है। इस कारण न कोई निजी यात्री वाहन चल रहे है और न कोई सरकारी वाहन। अधिकतर कंपनियां और उधोग बंद पड़े है, जिस कारण लोगों को गुजर बसर करने में दिक्कत हो रही है। इसी लाचारी के कारण नानी और पोती अपने घर जाने को मजबूर हुई। चूंकि अभी कोई वाहन नहीं चल रहीं थी, तो उन्होंने पैदल ही घर जानें की ठानी। और 45 डिग्री के तापमान में 25 कि.मी. की दूरी तय की।

हालांकि इतनी दूरी तय करने के बाद नानी और पोती की हालत खराब हो गई। और वे प्यास से छटपटाने लगे। अपनी नानी और खुद की प्यास को बुझाने के लिए वो बच्ची और नानी पानी ढूंढते-ढूंढ़ते तकरीबन 7 कि.मी. और आगे गई, लेकिन उसे पानी नहीं मिला और पानी के कारण बच्ची की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वहीं नानी बेहोश हो गई।
ये मामला राजस्थान के जालौर जिले के रानीवाड़ा इलाके का है। जहां रविवार को रेतीले टीलों में एक बच्ची की मौत हो गई। बच्ची अपनी नानी के साथ थी, यहां 45 डिग्री का तापमान था और गर्म टीलों पर सफर हो रहा था। जब ग्रामीणों को इनका पता लगा तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया।
सूचान के बाद मौके पर पहुची पुलिस ने बुजुर्ग को पानी पिलाया और अस्पताल में भर्ती किया। वहीं, मासूम के शव को भी अस्पताल ले जाया गया, वहां उसका पोस्टमॉर्टम हुआ और मौत का कारण पानी की कमी आई।

क्यों पैदल सफर कर रहे थे दोनों?
बताया जा रहा है कि 60 साल की सुखी देवी अपनी नातिन अंजलि के साथ सिरोही के पास रायपुर से दोपहर में रानीवाड़ा क्षेत्र के डूंगरी स्थित अपने घर आ रही थीं। कोरोना काल के चलते वाहनों की आवाजाही बंद होने के कारण उन्हें कोई साधन नहीं मिला। इस पर वह अपनी नातिन के साथ पैदल ही अपने गांव चल पड़ीं। करीब 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय करने से दोनों बुरी तरह से थक गई थीं।
इसी दौरान रेतीले धरों में दोनों प्यास से बेहाल हो गईं। पानी न मिलने से रोड़ा गांव के पास जहां मासूम अंजलि की मौत हो गई, वहीं सुखी देवी बेहोश होकर गिर गईं। कोरोना काल और गर्मी का मौसम होने के कारण काफी देर से कोई उधर से गुजरा भी नहीं तो लोगों को घटना की जानकारी भी नहीं मिल पाई। पोस्टमॉर्टम के बाद बच्ची के शव को दफना दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने साधा कांग्रेस पर निशाना
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर कांग्रेस सरकार पर सवाल खड़े किए। प्रकाश जावड़ेकर ने लिखा कि 9 घंटे तक पीने का पानी न मिलने के कारण हुई एक बच्ची की मृत्यु, बेहद शर्मनाक घटना है। इसके लिए राजस्थान सरकार ज़िम्मेदार है। सोनिया, राहुल, प्रियंका अब चुप क्यों हैं?
वहीं, जालौर जिले में पहुंचे राज्य सरकार के प्रतिनिधि लगातार इस घटना से जुड़े सवालों से बचते हुए नज़र आए।