1. हिन्दी समाचार
  2. योग और स्वास्थ्य
  3. नवंबर आते ही क्यों बढ़ने लगती है विंटर एलर्जी की परेशानी? जानिए लक्षण और बचाव के आसान तरीके

नवंबर आते ही क्यों बढ़ने लगती है विंटर एलर्जी की परेशानी? जानिए लक्षण और बचाव के आसान तरीके

नवंबर में ठंड, धूल, शुष्क हवा और डस्ट माइट्स के कारण विंटर एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है। बार-बार छींक, नाक बहना और आंखों में खुजली इसके प्रमुख लक्षण हैं। नियमित सफाई, मास्क और सही सावधानियों से इससे बचाव किया जा सकता है।

By: Nivedita 
Updated:
नवंबर आते ही क्यों बढ़ने लगती है विंटर एलर्जी की परेशानी? जानिए लक्षण और बचाव के आसान तरीके

नवंबर का महीना शुरू होते ही मौसम में ठंडक बढ़ने लगती है। सुबह और शाम की ठंडी हवा, वातावरण में धूल-मिट्टी और बदलते मौसम का असर कई लोगों की सेहत पर पड़ता है। इस दौरान कुछ लोगों को बार-बार छींक आना, नाक बहना, आंखों में खुजली और गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसे आमतौर पर विंटर एलर्जी कहा जाता है। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं, जबकि इसकी वजह एलर्जी भी हो सकती है।

नवंबर में क्यों बढ़ जाती है विंटर एलर्जी?

सर्दियों की शुरुआत में तापमान और नमी में बदलाव के कारण एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है। घरों में लंबे समय तक बंद खिड़कियां, धूल, बिस्तर में मौजूद धूल के कण (डस्ट माइट्स), फफूंद और पालतू जानवरों के बाल एलर्जी को ट्रिगर कर सकते हैं। इसके अलावा ठंडी और शुष्क हवा नाक की संवेदनशीलता बढ़ा सकती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या है, उन्हें इस मौसम में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

विंटर एलर्जी के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

विंटर एलर्जी होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • बार-बार छींक आना।
  • नाक से पानी बहना या नाक बंद रहना।
  • आंखों में खुजली और पानी आना।
  • गले में खराश या खुजली होना।
  • सूखी खांसी और सांस लेने में परेशानी।
  • त्वचा पर खुजली या रैशेज होना।

विंटर एलर्जी से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

1. घर की नियमित सफाई करें: घर में धूल जमा न होने दें। पर्दे, कालीन, गद्दे और बिस्तर की नियमित सफाई करें।

2. बिस्तर साफ रखें: चादर और तकिए के कवर नियमित रूप से धोएं। धूल के कणों से बचने के लिए जरूरत पड़ने पर एलर्जेन-प्रूफ कवर का इस्तेमाल करें।

3. मास्क पहनकर बाहर निकलें: धूल, धुएं और प्रदूषण वाले स्थानों पर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें।

4. कमरे में हवा का सही प्रवाह रखें: घर को पूरी तरह बंद रखने के बजाय मौसम और बाहरी प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए उचित वेंटिलेशन बनाए रखें।

5. ठंडी हवा से बचाव करें: बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ से ढकें। ठंडी हवा से परेशानी बढ़ती हो तो विशेष सावधानी रखें।

6. नाक की सफाई का ध्यान रखें: जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सलाइन नेजल स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

एलर्जी और सामान्य सर्दी-जुकाम में कैसे करें अंतर?

एलर्जी और सर्दी-जुकाम के लक्षण कई बार एक जैसे होते हैं, लेकिन कुछ अंतर इन्हें पहचानने में मदद कर सकते हैं। एलर्जी में बार-बार छींक, नाक और आंखों में खुजली की समस्या होती है। आमतौर पर इसमें बुखार नहीं आता। वहीं वायरल सर्दी-जुकाम में गले में दर्द, शरीर में थकान और कभी-कभी बुखार भी हो सकता है। एलर्जी के लक्षण किसी खास वातावरण या एलर्जेन के संपर्क में आने पर बढ़ सकते हैं, जबकि वायरल संक्रमण कुछ दिनों में ठीक होने लगता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर एलर्जी के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, रोजमर्रा के काम प्रभावित हों या बार-बार खांसी और सांस लेने में परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह लें। सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। बिना डॉक्टर की सलाह के एलर्जी की दवाओं का लगातार सेवन न करें। ध्यान रखें: विंटर एलर्जी से बचने का सबसे अच्छा तरीका उन चीजों की पहचान करना है, जिनसे आपको एलर्जी होती है। सही सावधानी और समय पर इलाज से सर्दियों का मौसम अधिक आरामदायक बनाया जा सकता है।

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...