नई दिल्ली : देश 30 जनवरी 2021 को बापू की 73 वीं पुण्यतिथि मना रहा है… जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जैसे कई दिग्गज नेता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे है…. हालांकि इस पुण्यतिथि के इतने साल बाद भी अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका हैं कि आखिर नाथुराम गोडसे ने महात्मा गांधी को क्यो मारा ?

आपको बता दें कि गोडसे की इस हत्या को लेकर कई तरह के तर्क दिये जा रहें है…. लेकिन अभी तक इसकी असली वजह सामने नहीं आई…. बता दें कि 30 जनवरी, 1948 को, नई दिल्ली का बिड़ला भवन। शाम के करीब 5.20 मिनट। बिड़ला भवन में रोज शाम को पांच बजे प्रार्थना होती थी। लेकिन इस दिन गांधीजी सरदार पटेल के साथ किसी मीटिंग में व्यस्त थे। वे विलंब से प्रार्थना के लिए निकले। बापू आभा और मनु के कंधों पर हाथ रखकर मंच की तरफ बढ़े, तभी गोडसे वहां पहुंचा।

पहले उसने हाथ जोड़कर नमस्ते कहा। इस बीच मनु ने गोडसे से कहा कि भैया! सामने से हट जाओ..बापू को जाने दो, उन्हें पहले से ही देर हो चुकी है। अचानक गोडसे ने मनु को धक्का दिया। अपने हाथों में छुपाकर रखी सबसे छोटी बैरेटा पिस्टल निकाली और गांधीजी के सीने में तीन फायर झोंक दिए। दो गोलियां आर-पार निकल गईं, जबकि एक धंसी रह गई। इस तरह 78 साल के महात्मा गांधी का दु:खद अंत हो गया। गोडसे ने गांधी को क्यों मारा, इसकी असली वजह कभी सामने नहीं आई। हालांकि माना जा रहा है कि वो देश के बंटवारे से नाराज था।

आपको बता दें कि नाथूराम गोडसे(19 मई, 1910-15 नवंबर, 1949) का जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था। हाईस्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़कर वो आजादी की लड़ाई में शामिल हो गया। दावा किया जाता है कि वो अपने भाइयों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) से जुड़ गया। बाद में उसने हिंदू राष्ट्रीय दल भी बनाया। गोडसे हिंदू राष्ट्र नाम से एक पत्र भी निकालता था।

गोडसे ने न कोर्ट में और न बाहर इसकी सही वजह बताई कि उसने गांधीजी को क्यों मारा? हालांकि सबके अपने-अपने तर्क हैं।
-कोई कहता है कि कश्मीर समस्या के बावजूद जिन्ना ने गांधीजी के पाकिस्तान दौरे को सहमति दे दी थी। गोडसे को लगने लगा था कि गांधीजी के मन में मुस्लिमों के प्रति ज्यादा दयाभाव है। गोडसे ने एक बार कहा था कि गांधीजी साधु हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिज्ञ नहीं।
-एक कारण यह भी माना जाता है कि पाकिस्तान को 55 करोड़ देने के मामले में जब कांग्रेस पीछे हटी, तब गांधीजी ने आमरण अनशन की चेतावनी दी थी। गोडसे गांधीजी के इस बर्ताव से गुस्से में था।

गोडसे कभी गांधी का चेला था। गांधीजी के नागरिक अवज्ञा आंदोलन में उसने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन बाद में जब गांधीजी ने बंटवारे का समर्थन किया, तब गोडसे के दिल में उनके प्रति नफरत भर गई। लेकिन उसने गांधीजी को क्यों मारा, इसकी असली वजह कभी सामने नहीं आ सकी।
बता दें कि गांधीजी की हत्या के इल्जाम में गोडसे को गिरफ्तार किया गया और पंजाब हाईकोर्ट में 8 नवंबर, 1949 को उसका ट्रायल हुआ। 15 नवंबर को उसे अंबाला जेल में फांसी दी गई।

आपको बता दें कि गांधीजी की हत्या में गोडसे सहित 8 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें तीन आरोपियों शंकर किस्तैया, दिगंबर बड़गे और विनायक दमोदरराव सावरकर में से बड़गे सरकारी गवाह बन गया। उसे बरी कर दिया गया। शंकर किस्तैया उच्च न्यायालय से बरी हो गया। सावरकर के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले। इसलिए उन्हें भी बरी कर दिया गया।

गांधीजी की हत्या में पांच आरोपियों गोडसे, मदनलाल पाहवा और विष्णु करकरे को आजीवन कारावास हुआ। नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी दी गई।