{ स्वतंत्र पत्रकार प्रणव गोस्वामी की कलम से }
NRC और CAA के विरोध में पिछले एक महीने से शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन हो रहा है और अब धीरे धीरे इस आंदोलन की पोल खुलने लगी है, विरोध प्रदर्शन का तरीका देखकर यह साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इनका काम CAA विरोध की आड़ में देश में बस अराजकता फैलाना है।
एक तरफ बीजेपी है जो देश भर में रैलियों के माध्यम से देश की जनता को जागरूक करने में लगी हुई है वहीं विपक्ष और मीडिया अपने भ्रामक प्रचार से अराजकता फैलाने में लगा हुआ है। एक तरफ कुछ ऐसे भी वीडियो सामने आये हैं जिनमे यह साफ़ दिखाई दे रहा है कि पैसे देकर भीड़ को प्रदर्शन में लाया जा रहा है और विरोध की आड़ में देश की सरकार को बदनाम किया जा रहा है।

वही इसके अलावा कुछ और वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिसमे यह साफ़ देखा जा सकता है कि विरोध की आड़ में भोले भाले मासूम बच्चों से देश विरोधी नारे लगवाये जा रहे है वही मासूम बच्चों के दिलों में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भी ज़हर भरा जा रहा है।
वीडियो में एक बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- ‘हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी। सवाल यह है कि कल को शाहीन बाग़ में हो रहा यह धरना तो खत्म हो जाएगा लेकिन इस कुत्सित और घृणित सोच का क्या होगा जो इन मासूम बच्चों के दिल और दिमाग में भरी जा रही है।
CAA-NRC के विरोध के नाम पर ऐसे पोस्टर लगवाए गए है जिनमे हिन्दू औरतों को बुर्का पहने हुए दिखाया जा रहा है वही हिन्दुओं के पवित्र चिन्ह स्वास्तिक का अपमान करने भी यह बाज नहीं आये, अपने विरोध प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल मजहबी नारे लगाने के लिए कर रही यह भीड़ उस वामपंथ का असली चेहरा है जो सालों से अपने आप को उदारवादी कहता है। ड्रेस कोड बुर्का रखना उस सत्ता को पुनर्जीवित करने की कोशिश है जिसने सदियों तक इस देश पर राज़ किया।
सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि देश में कई ऐसे लोग हैं जिनमे बॉलीवुड से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक शामिल है जो कि अपने स्वार्थ के लिये भोली भाली जनता को बरगलाने से भी नहीं चूक रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि इस नागरिकता कानून से किसी भी देशवासी की नागरिकता नहीं जाने वाली है बल्कि 3 पड़ोसी देशों { पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश } में रहने वाले गैर मुस्लिम जो की धार्मिक आधार पर प्रताड़ित हो रहे है उन्हें नागरिकता देने का कानून है।