5 जनवरी को दिल्ली स्थित JNU विश्वविद्यालय में हुई हिंसा से अब धीरे धीरे पर्दा उठता हुआ नज़र आ रहा है और बेनकाब हो रहे है वो सभी चेहरे जो सड़को पर आकर इस हिंसा के पीछे केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहरा रहे थे और उनकी पूरी कोशिश थी की देश को अराजकता के माहौल में धकेल दिया जाये।
उस दिन हुई हिंसा के बाद मीडिया गिरोह और टुकड़े टुकड़े गैंग ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी देश को बदनाम करने में, बड़े बड़े लेख लिखे गए लेकिन अब दिल्ली पुलिस के साथ हिंसा की जांच कर रही SIT की टीम ने खुलासा किया है की हिंसा के पीछे तो खुद आइशी घोष जो की वर्तमान में JNU स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष है उनका ही हाथ था।
वह पेरियार हॉस्टल में हमलावरों के आगे चल रही थीं। इस समय भी कुछ हमलावरों ने चेहरे ढके हुए थे। उन्होंने चेहरे पर रुमाल बांध रखा था और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आइशी घोष ने 3 व 4 जनवरी को सर्वर रूम में तोड़फोड़ भी की की थी। सिक्योरिटी गार्ड ने उनको रोका तो उससे धक्का-मुक्का की गई।
आइशी घोष मारपीट के अधिकतर वीडियो में दिखाई दे रही है और जो छात्र रजिस्ट्रेशन कराना चाहते थे उनके साथ मारपीट की गयी है और यह वही आइशी घोष है जिन्हे मीडिया के एक बहुत बड़े वर्ग ने पीड़ित बताकर आंदोलन का चेहरा बना दिया, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण तो अपनी फिल्म का समर्थन करने JNU चली गयी बिना ये जाने की हिंसा किसने की !
इससे भी बड़ा सवाल यह है की क्या दीपिका CAA के बारे में कुछ जानती भी होगी ? दीपिका के जाने का फायदा तो खुद पाकिस्तान ने उठाया इस देश को बदनाम करने के लिए तो क्या दीपिका अब माफ़ी मांगेगी ? लेकिन हमें इन घटनाओ की तह तक जाना होगा और समझना होगा।
क्या आपने कभी सोचा है की इस देश में हज़ारों कॉलेज है लेकिन JNU को ही देश की आवाज़ क्यों बना दिया जाता है ? एक छोटी सी घटना को बड़े प्रायोजित तरीके से इतना बड़ा बनाकर देश को बदनाम करने की साजिश की गयी तो आखिर इन सबके पीछे क्या रणनीति है ?
दरअसल यह सब आज का नहीं है, ये एक सोची समझी सरकार के खिलाफ की जाने वाली साजिश है जिसमे बस चेहरा बदल जाता है लेकिन एजेंडा वही रहता है, याद करिये जब साल 2016 में देश की संसद पर हमला करने वाले अफ़ज़ल गुरु को इसी कैंपस में महिमामंडित किया गया, भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाए गए , तब कन्हैया चेहरा था और आज हिंसा के बहाने देश को बदनाम करने की साजिश और चेहरा आइशी है, कल कोई और होगा लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की इस हिंसा के पीछे जो सूत्रधार है उन पर कार्यवाही कब होगी ?
अगर JNU की स्थापना समय को देखे तो उस वक्त इंदिरा गांधी को वामपंथी समर्थन प्राप्त था और सोवियत संघ वामपंथ का एक गढ़ हुआ करता था चीन नहीं, लेकिन धीरे धीरे इसी ज़हरीली विचारधारा ने सोवियत के टुकड़े कर दिए और आज यही वामपंथ छात्रों और मासूम लोगो के सहारे अपनी जड़े ज़माने में लगा हुआ है, आखिर कब तक ऐसा होगा ?
वामपंथ विचारधारा जहां भी गयी उस जगह का विनाश ही हुआ है, जिस बंगाल को देश की बौद्धिक संपदा कहा जाता है उसी बंगाल का 30 सालो में इन वामपंथियों ने बुरा हाल कर दिया, वहां चारो और सिर्फ गरीबी दिखाई देती है, यही हाल बाकी जगह का है और मोदी के PM बनने के बाद धीरे धीरे अब ये सिमट रहे है और यही बात है जो इन्हे पच नहीं रही है और अब इनका नया निशाना है मासूम और भोले छात्र जिनको भड़का कर ये देश के विकास को बाधित करना चाहते है।
अंत में एक सवाल जो आज भी जहन में कौंध रहा है की चलिए इस बार भी एजेंडे का पर्दाफाश हो गया और हो सकता है की कल को आइशी को गिरफ्तार भी कर लिया जाये लेकिन कब तक आप इस वामपंथ रूपी वृक्ष की टहनियों को काटते रहेंगे ? जड़ो पर कार्यवाही कब होगी ? ऐसा नहीं है की सरकार और ख़ुफ़िया एजेंसियों को कोई जानकारी नहीं होती होगी ! अवश्य होती होगी, लेकिन अब इंतज़ार है उस बड़ी कार्यवाही का जिसके बाद इन सब आंदोलनों से देश को निजात मिल सके.