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अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र जिन्हे मिली राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी

By: RNI Hindi Desk 
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अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र जिन्हे मिली राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी

आखिरकार अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ़ हो गया है और देश के PM मोदी जी ने कल संसद में राम मंदिर निर्माण को लेकर सरकार के द्वारा बनाये गए ट्रस्ट की जानकारी दी है और इसका नाम ‘श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ रखा गया है. अयोध्या के पूर्व राज परिवार के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को ट्रस्टी कमिश्नर बनाया गया है।

आपको बता दे कि अयोध्या के लोग इन्हे राजा साहब कहकर बुलाते है। लेकिन वह भगवान राम के वंशज नहीं हैं. राम क्षत्रिय थे और विमलेंद्र ब्राह्मण हैं. इस वजह से वह राम मंदिर जमीन मामले में हिस्सेदार नहीं हैं.

एक ब्राह्मण कैसे बना राजपरिवार का सदस्य –

इसके बारे में लोग बताते है कि अयोध्या के राज परिवार में कई पीढ़ियों तक कोई वारिस पैदा नहीं हुआ जिसके कारण बच्चे को गोद लेकर अयोध्या का वारिस बनाया गया था. बच्चा मिश्र परिवार से गोद लिया गया. ऐसे में अयोध्या में मिश्र सरनेम से वंश शुरु हो गया.

विमलेंद्र ने अयोध्या में ही पढ़ाई की. मां ने राजनीति में जाने से मना किया था. बहुत सालों तक वे राजनीति से दूर रहे. लेकिन कई साल बाद 2009 में वे बसपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा।

विमलेंद्र प्रताप मिश्र का भगवान रामलला से गहरा नाता है. किसी जमाने में इस राजवंश के सदस्य अयोध्या नगर की व्यवस्था चलाते थे, लेकिन समय बीतने के साथ ही यह परंपरा समाप्त हो गई. लेकिन राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी एक बार फिर उनके कंधों पर आ गई है. कहा जाता है कि बाबरी विध्वंस के बाद रामलला की मूर्ति विमलेंद्र ने अपने घर से ही भिजवाई थी.

अयोध्या राजवंश के राजा दर्शन सिंह की वंशावली से जुड़ी कड़ी में स्वर्गीय महारानी विमला देवी के दो पुत्र हैं विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र और शैलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के बड़े होने के कारण उन्हें इस राजवंश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।

बताते चले कि विमलेंद्र अपनी मां विमला देवी के नाम से एक समाजसेवी संस्था भी चलाते हैं. वो ‘विमला देवी फाउंडेशन न्यास’ के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य, संगीत एवं कला के उत्थान के लिए कार्य करता है।

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