नागरिकता संशोधन कानून को लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों का केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध- प्रदर्शन जारी है। इस विरोध- प्रदर्शन की आड़ में तमाम विपक्षी पार्टियां संविधान की मर्यादा को ताक पर रखकर लामबंद हो गए हैं। केरल से लेकर, राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और बंगाल समेत तमाम वो राज्य जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है वहां की राज्य सरकारें CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को खुली चुनौती दे रहे हैं। ऐसा करके ये तमाम राजनीतिक पार्टियां देश के अल्पसंख्यक मुसलमानों के मन में बेवजह डर पैदा कर रहे हैं और इस तरह से वो अपना वोट बैंक को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी अब सामने आने लगे हैं। देश के मुसलमानों के मन में इन राजीतिक पार्टियों द्वारा बैठाए गए डर के भय का फायदा कट्टरपंथी ताकतें भी उठाती नजर आने लगी है।
CAA के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में करीब दो महीने से सरकार के खिलफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में इसकी झलक अब दिखने लगी है। बिहार के जहानाबाद के रहने वाले जेएनयू के छात्र शरजील इमाम का सोशल मीडिया पर आया वीडियो इसका जीता जागता उदाहरण है। शरजील इमाम का शाहीन बाग में भीड़ को संबोधित करता हुआ जो वीडियो वायरल हुआ है उसमे वह असम को शेष भारत से काटने की बात कर रहा है। वह शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाले सिलीगुड़ी गलियारे को बंद करने की बात कर रहा है। उसने जिस गलियारे को देश से अलग- थलग करने की बात कर रहा है वहां से बिहार का किशनगंज जिला कुछ ही दूरी पर है और किशनगंज से बांग्लादेश की दूरी करीब 22 किलोमीटर है। बिहार का किशनगंज जिला मुस्लिम बहुल इलाका है। हाल ही में बिहार विधानसभा के लिए हुए उपचुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का एक विधायक जीतने में सफलता प्राप्त की है। इससे पहले भी इस इलाके से कोई मुस्लिम ही विधायक या फिर सांसद बनता है।
सिलीगुड़ी भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यही वो जगह है जो शेष भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ता है। पूर्वोत्तर के 8 राज्यों, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, असम, त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर और मिजोरम इसी सिलीगुड़ी के जरिए शेष भारत से जुड़े हुए हैं। इसके साथ-साथ वहां से बाग्लादेश की सीमा भी काफी नजदीक है, तो दूसरी तरफ चीन का बॉर्डर भी यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है। जून 2017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम का विवाद हुआ था जो महीनों तक खींच जाने के बाद आखिरकार स्थिति सामान्य हुआ। ऐसे में इस गलियारे के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत का ‘नेक’ कहा जाने वाला सिलीगुड़ी क्यों महत्वपूर्ण है।
भारत की आजादी के समय किशनगंज जिला हिंदू बहुल इलाका था। 1961 में किशनगंज में मुस्लिमों की आबादी 46 फीसदी थी औऱ तब यह इलाका पूर्णिया में आता था, लेकिन जब लालू यादव बिहार की सत्ता में आए तब उन्होंने पूर्णिया से काटकर किशनगंज को अलग जिला बना दिया, जो अब पूरी तरह मुस्लिम बहुल इलाका है। इस तरह असम, बिहार और बंगाल की सीमाएं बांग्लादेश से मिलती है जहां से भारत की आजादी के समय से ही बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठिए इन राज्यों में आ रहे हैं। ये सारा घुसपैठ एक योजनाबद्ध तरीके से हो रहा है। क्योंकि भारत के इन राज्यों में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं जो बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण दे रहे हैं।
पिछले दिनों भारत में नागरिकता कानून में हुए संशोधन और NRC की तैयारी की चर्चा से अब बांग्लादेशी घुसपैठिए डर गए हैं। उन्हें कहीं ना कहीं बांग्लादेश जाने का डर सताने लगा है। यही वजह है कि भारत में वोटबैंक के जो सौदागर हैं वो तिलमिला उठे हैं। शाहीन बाग में अभी जो कुछ भी हो रहा है इसके पीछे भी वोट बैंक ही है। शरजील इमाम तो बस एक मात्र चेहरा भर है। पर्दे के पीछे कई ऐसे चेहरे हैं जो अपना सपना साकार करने में जुटे हुए हैं उन्हें बस मौके का इंतजार है। पर्दे के पीछे वाले इस चेहरे को जानना बेहद जरूरी है। ऐसे में शाहीन बाग में शरजील इमाम के दिए गए बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता है क्योंकि उसके पीछे बहुत से शातिर लोग हैं जो अपने मौके के इंतजार में हैं जिसे बस बेनकाब करना जरूरी है।