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Baitul: काग़ज़ों में बह रहा पानी, खेतों में सूखा… जलसंसाधन विभाग की लापरवाही से भड़के किसान

मामला बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र स्थित देहगूड जलाशय से जुड़ा हुआ है। यहां से निकली करीब 14 किलोमीटर लंबी नहर को 12 दिसंबर को चालू किया गया था, लेकिन अब तक नहर का पानी किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच सका है।

By: Abhinav Tiwari 
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Baitul: काग़ज़ों में बह रहा पानी, खेतों में सूखा… जलसंसाधन विभाग की लापरवाही से भड़के किसान

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से जलसंसाधन विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में जहां किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने का दावा किया जा रहा है, वहीं ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। नहर में पानी मौजूद होने के बावजूद किसानों के खेत सूखे पड़े हैं और फसलें मुरझाने लगी हैं। हालात से परेशान किसान अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

देहगूड जलाशय की नहर से नहीं पहुंचा पानी खेतों तक

मामला बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र स्थित देहगूड जलाशय से जुड़ा हुआ है। यहां से निकली करीब 14 किलोमीटर लंबी नहर को 12 दिसंबर को चालू किया गया था, लेकिन अब तक नहर का पानी किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच सका है। किसानों का कहना है कि पानी मुश्किल से 5 किलोमीटर तक ही पहुंच पा रहा है, जिससे आगे का पूरा कमांड एरिया सिंचाई से वंचित रह गया है।

अवैध पाइपलाइन और मोटरों से हो रहा पानी का दुरुपयोग

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यह सामने आया कि नहर के 5 से 6 किलोमीटर आगे कुछ किसानों द्वारा अवैध रूप से नहर को तोड़कर जमीन के नीचे 8 इंच के पाइप डाल दिए गए हैं। इन पाइपों के जरिए नहर का पानी सीधे निजी कुओं में भरा जा रहा है और फिर भारी क्षमता की मोटरों से कमांड एरिया से बाहर तक पानी पहुंचाया जा रहा है। नहर की अधिग्रहित भूमि में कुएं खोदे जाने से आगे पानी का प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया है।

कमांड एरिया के किसान बूंद-बूंद को तरसे

किसानों का आरोप है कि इन अवैध कुओं पर 10-10 हॉर्सपावर की मोटरें लगाई गई हैं, जिनसे 4 से 5 किलोमीटर दूर तक पानी पहुंचाया जा रहा है। वहीं, नहर के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसान सिंचाई के लिए बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। इसके अलावा नहर कई स्थानों से क्षतिग्रस्त है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी नदियों और नालों में बहकर बर्बाद हो रहा है।

दो साल से टूटी नहर, मरम्मत तक नहीं

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नहर पिछले दो वर्षों से क्षतिग्रस्त हालत में है, लेकिन जलसंसाधन विभाग ने अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन और टालमटोल ही मिली।

80 प्रतिशत खेतों में नहीं हो पाई बोनी

नहर से समय पर पानी नहीं मिलने के कारण गांव की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि पर बोनी तक नहीं हो सकी है। जिन किसानों ने किसी तरह फसल बोई भी है, वह अब सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। हालात से नाराज और परेशान किसानों का सब्र अब टूट चुका है।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचे किसान, आंदोलन की चेतावनी

इसी के चलते करीब आधा सैकड़ा किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के साथ दोषी अधिकारियों एवं अवैध रूप से पानी लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे चक्काजाम और बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन और जलसंसाधन विभाग इस गंभीर समस्या को गंभीरता से लेगा, या फिर काग़ज़ों में बहता पानी किसानों की फसलों को यूं ही सूखने पर मजबूर करता रहेगा।

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