बड़वानी। कृषि उपज मंडी बड़वानी में रविवार को कपास खरीदी के दौरान पल्ली कटौती और नीलामी में देरी को लेकर किसान और व्यापारी आमने-सामने आ गए। मंडी प्रशासन की मौजूदगी में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। विवाद बढ़ने पर किसान और व्यापारी मंडी सचिव दिनेश नागराज के कक्ष में पहुंचे, जहां बातचीत के बाद मामले का समाधान निकाला गया।
पल्ली कटौती को लेकर हुआ विवाद
किसानों का आरोप था कि कपास की पल्ली का वास्तविक वजन करीब 250 से 500 ग्राम होता है, लेकिन व्यापारियों द्वारा करीब एक किलो तक वजन काटा जा रहा है। किसानों ने इसे लेकर नाराजगी जताई। बाद में मंडी प्रशासन की समझाइश के बाद तय किया गया कि पल्ली के वास्तविक वजन के अनुसार ही कटौती की जाएगी।सहमति बनने के बाद कपास की नीलामी और खरीदी दोबारा शुरू हो सकी।
नीलामी में देरी से किसान परेशान
ग्राम सजवानी के किसान जितेंद्र ने बताया कि वह सुबह 7 बजे एक पोटला कपास लेकर मंडी पहुंच गए थे, लेकिन नीलामी शुरू होने में देरी हुई। किसान का आरोप है कि कुछ व्यापारी आपसी मिलीभगत से कम भाव में कपास खरीदने का प्रयास कर रहे हैं।वहीं भीलखेड़ा से बैलगाड़ी में कपास लेकर पहुंचे किसान मुकेश ने करीब 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलने की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि फिलहाल 7,500 से 7,600 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहा है।
किसान संगठन ने उठाया मुद्दा
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के उपाध्यक्ष पिंटू भायल ने कहा कि व्यापारियों की संख्या कम होने और समर्थन मूल्य से कम भाव मिलने को लेकर किसानों में नाराजगी है। उनके मुताबिक रविवार को कपास का अधिकतम भाव करीब 7,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा।
व्यापारी बोले- कपास में नमी से भाव प्रभावित
व्यापारी सादिक मंसूरी ने बताया कि सीजन की शुरुआत होने के कारण कपास में नमी है, जिसके चलते भाव में ज्यादा तेजी नहीं है। फिलहाल 7,500 से 7,800 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव दिए जा रहे हैं और आने वाले दिनों में भाव बढ़ने की उम्मीद है।
मंडी सचिव ने विवाद सुलझने की बात कही
मंडी सचिव दिनेश नागराज के अनुसार रविवार को करीब 100 से 150 पोटले कपास की आवक हुई और भाव 7,200 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा। उन्होंने बताया कि पल्ली कटौती का विवाद सुलझा लिया गया है और अब पल्ली के मूल वजन के अनुसार ही कटौती की जाएगी।मंडी सचिव ने कहा कि मंडी के बाहर अवैध रूप से कपास खरीदी करने वालों के खिलाफ मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। किसानों के लिए पानी की व्यवस्था और व्यापारियों के लिए आईडी कार्ड की व्यवस्था भी की गई है।