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पन्ना में गिद्ध संरक्षण को लेकर जागरूकता सत्र, 648 से बढ़कर 1,127 हुई गिद्धों की संख्या

अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर पवई में वन विभाग ने हितधारकों के साथ संवेदनशीलता सत्र आयोजित किया। गिद्ध-सुरक्षित दवाओं, पशु शव निपटान और संरक्षण प्रयासों पर चर्चा हुई।

By: BS Yadav 
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पन्ना में गिद्ध संरक्षण को लेकर जागरूकता सत्र, 648 से बढ़कर 1,127 हुई गिद्धों की संख्या

पन्ना। अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर दक्षिण पन्ना वनमंडल के पवई वन परिक्षेत्र स्थित अरण्य भवन में गिद्ध संरक्षण को लेकर जागरूकता एवं संवेदनशीलता सत्र आयोजित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “मिलकर गिद्धों के लिए, मिलकर प्रकृति के लिए” रही।कार्यक्रम में वनमंडल अधिकारी अनुपम शर्मा, परिक्षेत्र अधिकारी पंकज दुबे, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोहित यादव सहित गौशाला संचालक, औषधि विक्रेता और स्थानीय वन अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

सत्र में गिद्धों की पारिस्थितिक भूमिका और मवेशियों के शवों के प्राकृतिक निपटान में उनके महत्व पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को डिक्लोफेनाक, ऐसिक्लोफेनाक, केटोप्रोफेन और नाइमेसुलाइड जैसी गिद्धों के लिए हानिकारक पशु औषधियों से होने वाले खतरे की जानकारी दी गई। वहीं मेलोक्सिकैम और टॉल्फेनामिक एसिड जैसे गिद्ध-सुरक्षित विकल्पों के उपयोग पर भी जोर दिया गया।गौशाला संचालकों को पशु शवों के सुरक्षित निपटान, औषधि विक्रेताओं को प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से बचने और पशु चिकित्सकों को गिद्ध-सुरक्षित दवाओं के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

दक्षिण पन्ना वन विभाग द्वारा गिद्ध संरक्षण के लिए गिद्ध-अनुकूल गौशाला स्व-प्रमाणन, नियमित गश्त, निगरानी और गिद्ध गणना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार, इन प्रयासों के बीच पिछले दो-तीन वर्षों में दर्ज गिद्धों की संख्या 648 से बढ़कर फरवरी 2026 की गणना में 1,127 हो गई है।कार्यक्रम में पवई के समीप शिकारपुरा में “जटायु सेवा केंद्र” स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसे गिद्ध संरक्षण, सुरक्षित पशु शव प्रबंधन, स्थानीय जागरूकता और हितधारकों के समन्वय के स्थानीय मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में सहमति बनी।

पन्ना से राजेश रावत की रिपोर्ट।

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