भोपाल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में भोपाल सेंट्रल जेल में भी जन्माष्टमी का कार्यक्रम भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में शामिल हुए और भगवान श्रीकृष्ण का विधि-विधान से पूजन कर पालना झुलाया। इस दौरान उन्होंने जेल में बंद पात्र कैदियों के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं।
भोपाल सेंट्रल जेल का सभागार जन्माष्टमी के मौके पर पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। बंदियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी आकर्षक झांकी तैयार की। इसके अलावा लघु नाटिका के माध्यम से मथुरा कारागार में श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का मंचन किया गया। भजन और धार्मिक गीतों से कार्यक्रम स्थल का माहौल आध्यात्मिक हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और आरती की तथा पालना झुलाकर जन्माष्टमी उत्सव में हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बंदियों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने पात्र बंदियों को उनकी सजा में एक महीने की विशेष छूट देने का ऐलान किया। इस निर्णय के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले बंदी अपनी सजा की अवधि पूरी होने से पहले रिहा हो सकेंगे।
जन्माष्टमी कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की जेलों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रहरी, कर्मचारियों और अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। जेल डीजी डॉ. वरुण कपूर ने विभाग की गतिविधियों और उपलब्धियों से जुड़ा प्रतिवेदन मुख्यमंत्री के सामने रखा और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया।
जेल विभाग की ओर से बताया गया कि बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव और उनके पुनर्वास के उद्देश्य से जेलों में धार्मिक, शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियां कराई जा रही हैं। बंदियों को योग समेत विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की जेलों में खुली मुलाकात की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में परिजनों ने जेल में बंद अपने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की।
कार्यक्रम में प्रदेश की रिहाई नीति में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया गया। अब जनजातीय दिवस के अवसर पर अच्छे आचरण वाले पात्र बंदियों की रिहाई का प्रावधान भी लागू किया गया है। जेल विभाग के अनुसार इस नीति को लागू करने में मध्यप्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कुछ बंदी केवल जुर्माना जमा नहीं कर पाने के कारण जेल में थे। ऐसे मामलों में सरकार की ओर से जुर्माना भरकर करीब 50 बंदियों को रिहा कराया गया है। इसके अलावा जिन बंदियों के पास कानूनी सहायता के लिए अधिवक्ता नहीं हैं, उन्हें वकील उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। महिला बंदियों के लिए भी आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि बंदियों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी बंदी को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बंदियों से कहा कि उन्हें अपनी गलतियों से सीख लेकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने जेल की लाइब्रेरी में अध्ययन करने, रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेने और अच्छे कार्यों से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है। विपरीत परिस्थितियों से भागने के बजाय उनका सामना कर जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जेल विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर बढ़ाने तथा आवासीय सुविधाओं को बेहतर करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। भोपाल सेंट्रल जेल में आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंदियों के सुधार और पुनर्वास के संदेश का भी माध्यम बना। वहीं सजा में एक महीने की विशेष छूट की घोषणा पात्र बंदियों के लिए कार्यक्रम की प्रमुख घोषणाओं में शामिल रही।