पन्ना। लगातार हो रही बारिश के बाद पन्ना तहसील के ग्राम बाराछ और डोभा के बीच स्थित बड़बीला बांध पूरी क्षमता के साथ लबालब भर गया है। बांध के भरने से जहां आसपास के क्षेत्र में खुशी है, वहीं इसकी जर्जर हालत को लेकर ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है।ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से बांध का समुचित रखरखाव और नियमित निरीक्षण नहीं किया गया। इसके चलते बांध की मेड़ कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक मेड़ में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, पत्थरों की पिचिंग धंस चुकी है और कई स्थानों से पानी का रिसाव भी हो रहा है। इसे लेकर आसपास के गांवों में अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
वर्षों से नहीं हुआ नियमित निरीक्षण
ग्राम डोभा निवासी चंदन सिंह यादव ने बताया कि बांध निर्माण के बाद से अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया गया और न ही यहां किसी कर्मचारी की स्थायी तैनाती की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते बांध के रखरखाव और मरम्मत का काम कराया जाता तो मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती।
मेड़ पर उगी झाड़ियां, रास्ते में गड्ढे
ग्रामीण बबलू आदिवासी के अनुसार बांध की मेड़ पर छोटे-छोटे पेड़, झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं। लंबे समय से इनकी सफाई भी नहीं कराई गई है। इसके अलावा बांध के ऊपर बने मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हो जाने से लोगों का आवागमन भी जोखिम भरा हो गया है।
पिचिंग की मरम्मत और रास्ते को दुरुस्त करने की मांग
ज्ञान सिंह यादव ने बताया कि बांध के ऊपर मिट्टी की जगह मोरम डलवाई जानी चाहिए, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा हो सके। उन्होंने बांध की मेड़ पर जहां-जहां पत्थरों की पिचिंग धंस गई है, वहां तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि बांध वर्तमान में पूरी तरह भर चुका है। ऐसे में यदि क्षतिग्रस्त हिस्सों की समय रहते जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो आसपास के गांवों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन से तत्काल तकनीकी निरीक्षण की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से बड़बीला बांध का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही मेड़ में आई दरारों, पानी के रिसाव और धंसी हुई पिचिंग की विशेषज्ञों से जांच कराकर आवश्यक मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने की अपील की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाने से संभावित दुर्घटना को टाला जा सकता है और आसपास के गांवों के लोगों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
राजेश रावत की रिपोर्ट