भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में विकास और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में करीब 41 हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने दुग्ध उत्पादकों के लिए भी 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है।
कैबिनेट ने प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत तीन अलग-अलग क्षेत्रीय तकनीकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। भोपाल में स्थित मौजूदा RGPV को मध्य भारत क्षेत्र के विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं जबलपुर में महाकौशल और उज्जैन में मालवा क्षेत्र के लिए तकनीकी विश्वविद्यालयों के मुख्यालय प्रस्तावित किए गए हैं।
कैबिनेट ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी फैसला लिया है। प्रत्येक जिले में शिकायतों के निराकरण के लिए लोकपाल नियुक्त करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इससे स्थानीय स्तर पर शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है।
सड़क अधोसंरचना से जुड़े प्रस्ताव के तहत बीना-खिमलासा मार्ग को फोरलेन बनाने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 2,763 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सड़क के चौड़ीकरण से क्षेत्र में आवागमन और परिवहन सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।
कैबिनेट ने नवगठित जिलों की जरूरतों को देखते हुए आयुष विभाग में नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी है। इससे नए जिलों में आयुष सेवाओं के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के लिए सरकार ने 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है। इस फैसले को दुग्ध क्षेत्र को समर्थन देने और उत्पादकों से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के दौरान देश की GDP वृद्धि को लेकर भी सरकार की ओर से प्रसन्नता व्यक्त की गई और इसके लिए बधाई दी गई। कैबिनेट के फैसलों में तकनीकी शिक्षा के विस्तार, सड़क निर्माण, दुग्ध क्षेत्र, आयुष विभाग और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल रहे।