कटनी। जिले में 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन को लेकर शिकायतों के बाद कई सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि सरकारी 108 एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद कुछ मामलों में मरीजों को निजी एंबुलेंस के जरिए अस्पताल तक पहुंचाया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ ट्रिप की रिपोर्टिंग में मरीज नहीं मिलने की जानकारी दर्ज होने के बावजूद संबंधित वाहनों की लोकेशन और किलोमीटर में बदलाव दिखाई देता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
शिकायत में CG 04 NW 6365, CG 04 NW 6368, CG 04 NS 4279 और CG 04 NS 7468 नंबर वाले वाहनों के संचालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अलग-अलग मोबाइल आईडी के जरिए ट्रिप जनरेट की गईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि इन ट्रिप से संबंधित GPS रिकॉर्ड की जांच की जाए तो वाहनों की वास्तविक आवाजाही और दर्ज किए गए विवरण के बीच स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पूरे मामले में ट्रिप जनरेशन, वाहन की लोकेशन और तय किए गए किलोमीटर को लेकर जांच की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि GPS डेटा, कॉल लॉग, ट्रिप शीट और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। यदि रिकॉर्ड में किसी तरह की अनियमितता मिलती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
शिकायत में कुछ एंबुलेंस के अंदर कथित तौर पर डीजे साउंड बॉक्स, LED लाइट और कैमरे लगे होने का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कुछ चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और निर्धारित योग्यता की जांच कराने की मांग भी उठी है। इन सभी बिंदुओं की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
108 एंबुलेंस सेवा सीधे मरीजों की आपातकालीन जरूरतों से जुड़ी है, इसलिए इसके संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है। GPS लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, ट्रिप शीट, वाहन लॉग और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का आपस में मिलान होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और क्या वास्तव में ट्रिप या किलोमीटर से जुड़ी कोई अनियमितता हुई है।