टीकमगढ़ के प्रसिद्ध कुंडेश्वर धाम में मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद सामने आया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष और सचिव की कार्यप्रणाली पर कुछ सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं। संत के मंदिर प्रवेश को लेकर सामने आए विवाद के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।
बुंदेलखंड पीठाधीश्वर एवं धजरई मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और सचिव मंदिर के मालिक नहीं, बल्कि व्यवस्थापक की भूमिका में हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर ट्रस्ट की आमसभा बुलाने और शिकायतों की समीक्षा कराने की मांग की है।
मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि बुंदेलखंड पीठाधीश्वर को कुंडेश्वर मंदिर में प्रवेश को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना को लेकर श्रद्धालुओं के एक वर्ग में नाराजगी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
श्रद्धालुओं और ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था संभालने वाले पदाधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी सेवा, धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बनाए रखना है। इसी आधार पर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है।
ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की ओर से पदाधिकारियों की कार्यशैली को लेकर अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें कथित विवाद और अनियमितताओं के दावे शामिल हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
अब आगामी आमसभा को लेकर सभी की नजरें बनी हुई हैं। माना जा रहा है कि बैठक में ट्रस्ट के संचालन, मंदिर की व्यवस्थाओं और सामने आई शिकायतों पर चर्चा हो सकती है। किसी भी प्रस्ताव या कार्रवाई का अंतिम निर्णय ट्रस्ट के नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होने की बात कही जा रही है।
श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने कुंडेश्वर धाम की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और धार्मिक परंपराओं एवं संत समाज के सम्मान को प्राथमिकता देने की मांग की है। फिलहाल मामले में प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से आगे होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।