गोरखपुर: शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन शिक्षक की भूमिका को कोई मशीन समाप्त नहीं कर सकती। उनके मुताबिक मशीन किसी सवाल का जवाब दे सकती है, लेकिन बच्चों को सवाल पूछना और सोचने की क्षमता विकसित करना शिक्षक ही सिखाता है।
शिक्षक दिवस समारोह में प्रदेश के 81 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें 61 शिक्षक बेसिक शिक्षा और 20 माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े रहे। सम्मान पाने वालों में 33 महिला शिक्षक भी शामिल थीं। इनमें 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया गया। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इसके साथ ही निशुल्क बस यात्रा और सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की अतिरिक्त सुविधा का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर महान शिक्षाविद और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान प्राचीन काल से ज्ञान और गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ी रही है। उन्होंने वेदव्यास, चाणक्य, आर्यभट्ट, सुश्रुत, गार्गी और मैत्रेयी जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ने लंबे समय तक दुनिया को दिशा देने का काम किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन कायाकल्प, निपुण भारत, प्रोजेक्ट अलंकार, पीएम श्री विद्यालय और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय जैसी योजनाओं की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में 25 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से ज्यादा स्कूलों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। उन्होंने दो लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराने का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन और 3-डी प्रिंटिंग जैसी तकनीकों का प्रभाव और बढ़ेगा। ऐसे में विद्यार्थियों को इन तकनीकों से परिचित कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 385 माध्यमिक विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब संचालित हो रही हैं। इसके अलावा कुछ विद्यालयों में औद्योगिक समूहों के सहयोग से ड्रीम लैब और हजारों उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ‘Learning by Doing’ जैसी गतिविधियां संचालित किए जाने का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 70 हजार से अधिक बाल वाटिकाएं तैयार होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआती उम्र से ही बच्चों को खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा और आवासीय सुविधाओं पर सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिए जाने की बात भी कही गई। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, सहायक उपकरण, व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल और ब्रेल पुस्तकों जैसी सुविधाओं का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने माध्यमिक शिक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने का प्रयास किया गया है। इससे विद्यार्थियों को आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए समय पर तैयारी का अवसर मिलता है। उन्होंने राज्य और जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी भी दी।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाएं करना आसान है, जबकि स्कूलों में वास्तविक सुविधाएं विकसित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन शिक्षा को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से समय के साथ खुद को अपडेट करने और विद्यार्थियों को बदलती दुनिया के अनुरूप तैयार करने का आह्वान किया।
समारोह में मुख्यमंत्री के संबोधन का सबसे प्रमुख हिस्सा AI और शिक्षक की भूमिका को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि भविष्य में तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, शिक्षक की आवश्यकता बनी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मशीन जानकारी उपलब्ध करा सकती है और किसी सवाल का उत्तर दे सकती है, लेकिन बच्चों में सवाल पूछने की आदत, तर्क करने की क्षमता और सही दिशा में सोच विकसित करने का काम शिक्षक करता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल यह बताने के बजाय कि क्या करना है, यह सिखाने की अपील की कि किसी समस्या को कैसे समझना है, उसका समाधान कैसे तलाशना है और तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग कैसे करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बच्चों को सूचनाएं दे सकता है, लेकिन संस्कार और मानवीय मूल्यों का निर्माण नहीं कर सकता। शिक्षक के पास विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी या देश का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति बन सकता है। इसलिए शिक्षक द्वारा दिए गए संस्कार और अनुशासन का उसके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा शिक्षा तंत्र तैयार करना है, जहां हर बच्चे को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। गरीब परिवारों के बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है।उन्होंने शिक्षकों से संकल्प लेने की अपील की कि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक विद्यार्थी को आगे बढ़ने का अवसर मिले। मुख्यमंत्री के मुताबिक तकनीक के साथ संस्कारों का संतुलन बनाए रखते हुए शिक्षा को मजबूत करना ही विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।