गोरखपुर। भारतीय रेलवे ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए स्वदेशी तकनीक से विकसित ‘कवच 4.0’ प्रणाली का विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में 660 रूट किलोमीटर रेल नेटवर्क को कवच सिस्टम से लैस करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 295 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
रेलवे के मुताबिक इज्जतनगर मंडल में प्रस्तावित परियोजना के तहत कुल 53 स्टेशनों को कवच 4.0 सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा को बेहतर बनाना और संभावित मानवीय चूक से होने वाली घटनाओं के जोखिम को कम करना है।
कवच एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह तकनीक खासतौर पर सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) जैसी परिस्थितियों में सुरक्षा बढ़ाने में मदद करती है। इसके अलावा कोहरे जैसे कम दृश्यता वाले मौसम में ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाने में भी कवच तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
इज्जतनगर मंडल के साथ पूर्वोत्तर रेलवे के दूसरे हिस्सों में भी कवच प्रणाली स्थापित करने का काम चल रहा है। लखनऊ और वाराणसी मंडल के अलग-अलग रेल सेक्शनों में परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा कुस्मही-भटनी और गोरखपुर-गोंडा रेल सेक्शन को भी कवच प्रणाली से लैस करने की दिशा में काम जारी है।
रेलवे की योजना चरणबद्ध तरीके से प्रमुख रेल मार्गों को कवच प्रणाली के दायरे में लाने की है। पहले उन रूटों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां ट्रेनों और यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है। इसके बाद अन्य रेल सेक्शनों में भी इस सुरक्षा तकनीक का विस्तार किया जाएगा।
कवच 4.0 के विस्तार से पूर्वोत्तर रेलवे के महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि विभिन्न चरणों और टेंडर प्रक्रिया के चलते परियोजना पूरी होने की निश्चित समय-सीमा फिलहाल स्पष्ट नहीं है। रेलवे का कहना है कि परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्वदेशी कवच तकनीक के विस्तार को ट्रेन संचालन की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।