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पन्ना में हलछठ महोत्सव की धूम, दोपहर 12 बजे हुआ भगवान बलदाऊ जी का जन्मोत्सव

पन्ना में हलछठ के अवसर पर भगवान बलदाऊ जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। दोपहर 12 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच जन्मोत्सव हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं ने संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर पसई के चावल और महुआ का पूजन किया।

By: Nivedita 
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पन्ना में हलछठ महोत्सव की धूम, दोपहर 12 बजे हुआ भगवान बलदाऊ जी का जन्मोत्सव

पन्ना।  मंदिरों की नगरी पन्ना में भाद्रपद कृष्ण षष्ठी यानी हलछठ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर किसानों के आराध्य भगवान श्री बलदाऊ जी का जन्मोत्सव धूमधाम से आयोजित हुआ। दोपहर ठीक 12 बजे वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और ढोल-नगाड़ों के बीच भगवान बलराम जी के जन्म की धार्मिक रस्म पूरी की गई। भगवान बलदाऊ जी के जन्मोत्सव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पन्ना राजपरिवार के सदस्य महाराजा छत्रशाल जु देव द्वितीय ने भी मंदिर पहुंचकर परंपरागत पूजा की और नगरवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

बलदाऊ जी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

जन्मोत्सव के निर्धारित समय पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। भगवान बलदाऊ जी के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

सेंट पॉल कैथेड्रल की शैली में बना है मंदिर

पन्ना का प्रसिद्ध बलदेव जी मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए विशेष पहचान रखता है। जानकारी के अनुसार इसका निर्माण संवत 1933 में तत्कालीन पन्ना नरेश महाराजा रुद्र प्रताप सिंह के शासनकाल में कराया गया था। मंदिर की वास्तुकला में लंदन के प्रसिद्ध सेंट पॉल कैथेड्रल की शैली का प्रभाव दिखाई देता है।

16 कलाओं से जुड़ी है मंदिर की खास संरचना

मंदिर की बनावट में भगवान की 16 कलाओं की अवधारणा को ध्यान में रखा गया है। परिसर में 16 सीढ़ियां, 16 गुंबद, 16 खंभे, 16 खिड़कियां और 16 झरोखे होने की बात बताई जाती है। मंदिर की संरचना ऐसी बताई जाती है कि मौसम के अनुसार अंदर का वातावरण अपेक्षाकृत अनुकूल बना रहता है। यही विशेषताएं इसे पन्ना के प्रमुख धार्मिक और स्थापत्य स्थलों में शामिल करती हैं।

अकाल से जुड़ी है मंदिर निर्माण की मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार बुंदेलखंड में पड़े भीषण अकाल से राहत की कामना के साथ महाराजा ने वृंदावन से शालिग्रामी शिला की प्रतिमा मंगवाकर भगवान बलदाऊ जी की स्थापना कराई थी। इसके बाद क्षेत्र में अकाल न पड़ने की धार्मिक मान्यता प्रचलित है।

महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

हलछठ के अवसर पर क्षेत्र में महिलाओं ने भी विशेष पूजा-अर्चना की। पुत्रवती महिलाओं ने अपने बच्चों की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। व्रत के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रूप से पसई के चावल और महुआ का पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने परिवार की खुशहाली और संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। पन्ना में भगवान बलदाऊ जी के जन्मोत्सव और हलछठ पर्व के चलते पूरे दिन धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा।

 

 रिपोर्ट – राजेश रावत 

 

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