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बड़वानी में कपास सीजन की शुरुआत, पहले दिन ₹9 हजार तक पहुंचा भाव; समर्थन मूल्य को लेकर किसान संघ सख्त

बड़वानी कृषि मंडी में नए कपास सीजन की शुरुआत हो गई है। पहले दिन कपास का अधिकतम भाव ₹9,000, न्यूनतम ₹7,725 और मॉडल भाव ₹8,275 प्रति क्विंटल रहा। किसान संघ ने समर्थन मूल्य से कम खरीदी होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं मंडी की सड़कों, गड्ढों और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग भी उठाई गई है।

By: Nivedita 
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बड़वानी में कपास सीजन की शुरुआत, पहले दिन ₹9 हजार तक पहुंचा भाव; समर्थन मूल्य को लेकर किसान संघ सख्त

बड़वानी।  कृषि उपज मंडी समिति बड़वानी में नए कपास सीजन की शुरुआत हो गई है। पहले दिन कपास लेकर 11 वाहन और 3 बैलगाड़ियां मंडी पहुंचीं। नीलामी में कपास का अधिकतम भाव ₹9,000 प्रति क्विंटल, न्यूनतम ₹7,725 और मॉडल भाव ₹8,275 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। हालांकि किसानों को सीजन की पहली आवक पर बेहतर कीमत की उम्मीद थी, लेकिन किसान संघ का कहना है कि अधिकांश किसानों को अपेक्षित भाव नहीं मिल पाया। इससे कपास की लागत और बाजार मूल्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

किसानों ने लाभकारी भाव की मांग उठाई

भारतीय किसान संघ के जिला मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश काग के मुताबिक मुहूर्त की बोवनी पर किसानों को अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद थी। उनका कहना है कि ₹9,000 का अधिकतम भाव केवल एक वाहन को मिला, जबकि बाकी किसानों को अपेक्षाकृत कम दर पर कपास बेचनी पड़ी। किसान संगठन का कहना है कि बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई समेत खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कपास का बाजार भाव किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालता है।

समर्थन मूल्य से कम खरीदी पर आंदोलन की चेतावनी

किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी दिनों में कपास की खरीदी समर्थन मूल्य से कम दर पर होती है, तो किसानों के हित में आंदोलन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य मिलना जरूरी है।

कम बारिश से उत्पादन पर भी असर

किसान संघ के अनुसार इस बार कई क्षेत्रों में बारिश पर्याप्त नहीं होने के कारण कपास की पैदावार प्रभावित हुई है। उत्पादन में संभावित कमी के बीच किसानों को अब बेहतर बाजार भाव की उम्मीद है। किसानों का अनुमान है कि सीजन आगे बढ़ने के साथ मांग और गुणवत्ता के आधार पर कपास की कीमत ₹11 हजार से ₹12 हजार प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है।

मंडी प्रशासन ने बताया पिछले साल से बेहतर भाव

मंडी के प्रभारी सचिव दिनेश नागराज ने बताया कि पहले दिन नीलामी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से हुई। उन्होंने कपास का अधिकतम भाव ₹9,000, न्यूनतम ₹7,725 और मॉडल भाव ₹8,275 प्रति क्विंटल बताया। उनके अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार शुरुआती भाव बेहतर हैं। मंडी प्रशासन का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत किसान अपनी उपज मंडी परिसर में लेकर आ रहे हैं। कम मात्रा में कपास लाने वाले छोटे किसानों की पोटलों की नीलामी भी परिसर के भीतर कराई जा रही है।

मंडी परिसर में गड्ढों से परेशानी

कपास की आवक शुरू होने के साथ मंडी की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। किसान संघ का कहना है कि परिसर में पिछले दो-तीन वर्षों से कई जगह बड़े गड्ढे हैं। आवक बढ़ने से पहले इनकी मरम्मत और मंडी की अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर किए जाने की जरूरत है। किसानों के मुताबिक खराब सड़क और गड्ढों के कारण उपज लेकर मंडी पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी होती है।

नई सब्जी मंडी का मुद्दा फिर उठा

किसान संघ ने बड़वानी में प्रस्तावित नई सब्जी मंडी का मामला भी उठाया है। संगठन के अनुसार वर्ष 2017 में पांच एकड़ क्षेत्र में नई सब्जी मंडी बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अभी तक योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है। किसानों ने प्रशासन से इस परियोजना की स्थिति स्पष्ट करने और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की है।

छोटे किसानों की उपज की मंडी में हो रही नीलामी

मंडी प्रशासन के अनुसार अब कम मात्रा में कपास लेकर आने वाले किसानों की उपज की नीलामी भी मंडी परिसर में ही कराई जा रही है। इससे छोटे किसानों को बाहर उपज बेचने की मजबूरी से राहत मिली है। हालांकि किसान संगठन का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए मंडी में जरूरी व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर किया जाना चाहिए।

2 सितंबर से औपचारिक रूप से शुरू होगा नया सीजन

मंडी समिति के अनुसार 2 सितंबर को पूजा-अर्चना के साथ कपास खरीद के नए सीजन का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान किसान, व्यापारी और मंडी कर्मचारी मौजूद रहेंगे। मंडी प्रशासन ने किसानों से अपनी कपास मंडी परिसर में लाने की अपील की है। किसानों को उपज के साथ आधार कार्ड और मोबाइल नंबर लाना होगा।

अब आने वाले दिनों के भाव पर किसानों की नजर

सीजन के पहले दिन ₹9,000 प्रति क्विंटल का अधिकतम भाव सामने आया है, लेकिन किसानों की नजर अब आगामी नीलामी पर है। उत्पादन में संभावित कमी और बढ़ती खेती लागत के बीच किसान चाहते हैं कि उन्हें अपनी कपास का लाभकारी मूल्य मिले। आने वाले दिनों में कपास की आवक बढ़ने के बाद बाजार का रुख क्या रहता है, इस पर किसानों और व्यापारियों दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं।

 

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