गोरखपुर। गंभीर मरीजों और आपदा की स्थिति में त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एम्स गोरखपुर एक अहम कदम उठा रहा है। संस्थान परिसर में पहले से मौजूद हेलीपैड को एयर एम्बुलेंस के संचालन के लिहाज से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की तैयारी चल रही है। इसका उद्देश्य मरीजों को कम से कम समय में अस्पताल की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाना है।
एम्स गोरखपुर के अधिकारियों के अनुसार हेलीपैड में कुछ जरूरी तकनीकी बदलाव किए जाने हैं। इसके लिए एयरफोर्स के अधिकारियों से भी सुझाव लिए गए हैं। हेलीपैड के आसपास मौजूद बाधाओं को दूर करने के साथ सुरक्षा मानकों को बेहतर किया जाएगा। हेलीपैड के पास स्थित एक बिजली के खंभे को हटाने समेत अन्य जरूरी मॉडिफिकेशन प्रस्तावित हैं, ताकि एयर एम्बुलेंस की लैंडिंग और टेकऑफ सुरक्षित तरीके से हो सके।
एम्स परिसर में हेलीपैड की लोकेशन भी इस सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह ओपीडी के नजदीक स्थित है, जिससे एयर एम्बुलेंस से पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल की इमरजेंसी या ट्रॉमा सेंटर तक तेजी से ले जाने में मदद मिल सकती है। अस्पताल को एयर एम्बुलेंस के आने की सूचना पहले से मिलने पर मरीज के लिए स्ट्रेचर, एम्बुलेंस, बेड और जरूरी मेडिकल टीम तैयार रखी जा सकेगी। हेलीपैड पर उतरने के तुरंत बाद मरीज को उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
हेली एम्बुलेंस की सुविधा का सबसे बड़ा लाभ उन मरीजों को मिलने की उम्मीद है, जहां सड़क या रेल मार्ग से अस्पताल पहुंचने में काफी समय लगता है। दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को कम समय में एम्स तक लाने में एयर एम्बुलेंस उपयोगी साबित हो सकती है। खासकर गंभीर चोट, दुर्घटना या ऐसी चिकित्सा परिस्थितियों में, जहां समय पर उपचार मिलना बेहद जरूरी होता है, यह सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
एम्स के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग के मुताबिक प्राकृतिक आपदा या बड़े हादसे के दौरान सड़क और रेल संपर्क प्रभावित होने की स्थिति में हेली एम्बुलेंस बेहद उपयोगी हो सकती है। भूकंप, बड़े हादसे या मास कैजुअल्टी जैसी परिस्थितियों में बड़ी संख्या में घायलों को तेजी से अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एयर रूट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
एम्स गोरखपुर के डिजास्टर मैनेजमेंट इंचार्ज डॉ. अरुण पाण्डेय के अनुसार गंभीर मरीजों के उपचार में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसकी स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सकती है। ऐसे में हेली एम्बुलेंस मरीज और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के बीच दूरी कम करने में अहम माध्यम बन सकती है।
एम्स अधिकारियों के मुताबिक हेलीपैड को एयर एम्बुलेंस के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। फिलहाल किसी विशेष एयरलिफ्ट प्रोटोकॉल को लेकर व्यवस्था तय नहीं की गई है। आवश्यकता पड़ने पर मरीज को एयर एम्बुलेंस से एम्स लाने या यहां से दूसरे अस्पताल भेजने की संभावना रहेगी।
एम्स गोरखपुर में एयर एम्बुलेंस की सुविधा विकसित होने से केवल गोरखपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के बड़े क्षेत्र के गंभीर मरीजों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर ऐसे इलाकों के लिए यह सुविधा अहम हो सकती है, जहां सामान्य परिवहन के जरिए मरीज को समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। एम्स की यह पहल आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के साथ त्वरित आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।