बड़वानी। देशगांव-जुलवानिया फोरलेन के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को जुलवानिया क्षेत्र के किसानों ने भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट गेट के बाहर धरना दिया। किसानों ने अधिग्रहित जमीन के बदले वर्तमान कानून के अनुसार 4 गुना मुआवजा देने और सर्वे में दर्ज खामियों को सुधारने की मांग उठाई। धरने के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
भारतीय किसान संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष मंसाराम पंचोले ने कहा कि झाबुआ जिले में जमीन अधिग्रहण के मामले में किसानों के आंदोलन के बाद 4 गुना मुआवजे की मांग स्वीकार की गई थी। उनका कहना है कि बड़वानी जिले के प्रभावित किसानों को भी इसी आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए। किसान संघ ने मौजूदा अवार्ड की समीक्षा कर नया अवार्ड जारी करने और वर्तमान गाइडलाइन के मुताबिक चार गुना मुआवजा निर्धारित करने की मांग की है।
किसानों ने आरोप लगाया कि जमीन के सर्वे के दौरान कई महत्वपूर्ण चीजों को रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया। किसानों के मुताबिक कुछ जगह सिंचित भूमि को असिंचित दर्ज किया गया, जबकि कुएं, पाइपलाइन और मकान जैसी संपत्तियां भी सर्वे से छूट गईं। किसानों का दावा है कि कुछ प्रभावित लोगों को सर्वे की जानकारी भी समय पर नहीं मिली। उनका कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद कई किसानों को पता चला कि उनकी जमीन प्रस्तावित राजमार्ग की सीमा में आ रही है।
देशगांव के किसान राजेश ने आरोप लगाया कि उनकी सिंचित भूमि को असिंचित दर्ज किए जाने से मुआवजे की राशि प्रभावित हो रही है। उन्होंने कुएं, पुराने पेड़ और पाइपलाइन का मुआवजा नहीं मिलने की बात भी कही। किसान के मुताबिक उनका पक्का डेयरी फार्म सर्वे में टीन शेड के रूप में दर्ज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी करीब 3 एकड़ 60 डिसमिल जमीन राजमार्ग परियोजना में जा रही है, जिसमें भूमि की प्रकृति भी कथित तौर पर सही दर्ज नहीं की गई। उन्होंने दोबारा सर्वे कराकर रिकॉर्ड में सुधार और चार गुना मुआवजा देने की मांग की।
अमलगांव की किसान रंजना ने भी सर्वे प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उन्हें सर्वे की पूर्व सूचना नहीं मिली और सीधे नोटिस प्राप्त हुआ। उनका आरोप है कि ट्यूबवेल और पाइपलाइन को सर्वे में शामिल नहीं किया गया, जबकि सिंचित जमीन को असिंचित दर्ज कर दिया गया। उन्होंने मांग की कि बड़वानी के किसानों को भी चार गुना मुआवजा दिया जाए।
भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से प्रभावित किसानों की जमीन का दोबारा सर्वे कराने, छूटी हुई संपत्तियों को रिकॉर्ड में शामिल करने और मुआवजे का उचित निर्धारण करने की मांग की है। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।
धरने के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में NH-347 देशगांव-जुलवानिया फोरलेन के लिए अधिग्रहित भूमि का पुनः सर्वे कराने, सर्वे की त्रुटियां दूर करने और चार गुना मुआवजा देने की मांग प्रमुखता से रखी गई।