बुरहानपुर। आधी रात जैसे ही घड़ी की सुई 12 पर पहुंची, श्री स्वामीनारायण मंदिर का पूरा परिसर एक साथ गूंज उठा—“नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…”। चारों ओर भक्ति, उल्लास और जयकारों का ऐसा माहौल बना कि मानो बुरहानपुर में स्वयं नंदलाला ने जन्म लिया हो। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर शाम से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। देखते ही देखते मंदिर परिसर भक्तों से भर गया। मुरली की धुन, भक्ति गीतों, भजनों और आरती के बीच श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन नजर आए।
श्रद्धालु बेसब्री से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही रात के 12 बजे, मंदिर परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। विधि-विधान से पूजन और आरती के बाद लड्डू गोपाल को एक क्विंटल से अधिक वजनी चांदी के भव्य पालने में विराजित कर झुलाया गया। पालना झूलते ही भक्तों की खुशी देखते ही बनी। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और जयकारों के साथ जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। इस दौरान श्रद्धालुओं को चॉकलेट और प्रसाद का वितरण भी किया गया। पूरा मंदिर परिसर देर रात तक कृष्ण भक्ति में डूबा रहा।
कृष्ण जन्मोत्सव में बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह, एसडीएम पल्लवी पौराणिक सहित प्रशासनिक अधिकारी भी श्री स्वामीनारायण मंदिर पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
जन्मोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और गरबा का भी आयोजन हुआ। श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। कहीं भगवान कृष्ण के भजनों की गूंज सुनाई दी तो कहीं भक्त गरबा करते हुए कान्हा की भक्ति में झूमते नजर आए।
कृष्ण जन्मोत्सव के बाद मंदिर परिसर में दहीहांडी का रोमांच भी देखने को मिला। माखन-मटकी की कृष्ण लीला को जीवंत करते हुए युवाओं की टोलियां मैदान में उतरीं। एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाया गया। जैसे-जैसे टोली मटकी की ओर बढ़ती गई, वैसे-वैसे नीचे खड़े श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता गया। आखिरकार “जय कन्हैया लाल की जय” के गगनभेदी जयकारों के बीच दहीहांडी फूट गई। इसके साथ ही पूरा मंदिर परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
बुरहानपुर के श्री स्वामीनारायण मंदिर में मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम रहा। आधी रात को नंदलाला के जन्म के साथ शुरू हुआ उत्सव दहीहांडी के रोमांच तक पहुंचा। भजनों की मिठास, जयकारों की गूंज, चांदी के पालने में झूलते लड्डू गोपाल और दहीहांडी का रोमांच—पूरे आयोजन ने बुरहानपुर को कृष्णमय कर दिया।
हर जुबां पर बस एक ही जयकारा था—
“नंद के घर आनंद भयो… जय कन्हैया लाल की!”
“राधे-राधे… कृष्णा-कृष्णा…”