मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उज्जैन में आयोजित होने वाले महापर्व ‘सिंहस्थ-2028’ की धीमी गति और विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र भेजा है।
‘यह प्रश्न नहीं, प्रश्न-पत्र है’: कांग्रेस का हमला
पत्र में जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि सरकार सिंहस्थ से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जानबूझकर अंतिम समय के दबाव की ओर धकेल रही है। उन्होंने आशंका जताई है कि अंतिम क्षणों में आपातकालीन प्रक्रियाओं का हवाला देकर कम गुणवत्ता वाले निर्माण, लागत में वृद्धि और कमीशनखोरी के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है।
प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति पर मांगे जवाब
कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र के माध्यम से सरकार से कई बड़ी ढांचागत परियोजनाओं की वर्तमान भौतिक और वित्तीय प्रगति पर जवाब मांगा है:
- ₹2,700 करोड़ की उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन परियोजना: इस महत्वपूर्ण मार्ग की निविदा प्रक्रिया में बार-बार हो रहे बदलावों और निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
- ग्रीनफील्ड हाईवे व भूमि अधिग्रहण: उज्जैन-जावरा और उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड हाईवे के भूमि अधिग्रहण, मुआवजा विवादों और कानूनी स्वीकृतियों की समय-सीमा सार्वजनिक करने को कहा गया है।
- 30.15 किमी कान्ह डायवर्जन परियोजना: क्षिप्रा नदी के जल की शुद्धता से जुड़ी इस परियोजना को सितंबर 2027 तक पूरा करने की गारंटी देने और इसकी दिन-प्रतिदिन की प्रगति सार्वजनिक करने की बात कही गई है।
- ₹445 करोड़ की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: मई 2027 की समय-सीमा के साथ इसके शेष तकनीकी परीक्षण और पाइपलाइन कार्य की स्थिति पूछी गई है।
- ₹2,923.84 करोड़ के 22 स्वीकृत कार्य: सरकार से पूछा गया है कि स्वीकृत 22 कार्यों में से कितने शुरू हुए हैं, कितने टेंडर स्तर पर हैं और कितने केवल कागजों तक सीमित हैं।
- 6 प्रमुख पुल व अन्य बुनियादी ढांचे: दिसंबर 2026 तक पूरे होने वाले 6 पुलों, नईखेड़ी सड़क, चौड़ीकरण, सीवरेज और घाट निर्माण की स्वीकृत लागत, ठेकेदार के नाम और भुगतान का ब्योरा मांगा गया है।
पारदर्शिता और ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ की मांग
- पत्र में सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि:
- सभी प्रमुख सिंहस्थ परियोजनाओं की थर्ड पार्टी ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने सार्वजनिक की जाए।
- सिंहस्थ-2028 की प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट एक सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए।
- शुरुआती लागत और वर्तमान अनुमानित लागत का तुलनात्मक विवरण ठेकेदारों के नाम के साथ पारदर्शी किया जाए।
आस्था का पर्व या भ्रष्टाचार का अवसर?
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को ध्यान दिलाया कि उज्जैन उनका गृह नगर है और सिंहस्थ का सफल व पारदर्शी आयोजन उनकी प्राथमिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार जनता को यह भरोसा दिलाएगी कि सिंहस्थ-2028 आस्था और विकास का पर्व बनेगा, या फिर यह अंतिम समय की हड़बड़ी में सरकारी धन की बर्बादी और कमीशनखोरी का जरिया बनकर रह जाएगा।