{ जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट }
जीवन चक्र को अपने चाक के पहिये से चलाने वाले कुम्हारों के लिए उत्तर प्रदेश योगी सरकार ने माटी कला योजना से देश मे यूपी की मिट्टी को चमकाने की शुरुआत की है।
गी सरकार ने प्रदेश में माटी कला योजना का गठन कर प्रदेश में मिट्टी के दिए और कुल्हड़ जैसे लघु उधोग का काम करने वाले कुम्हारों को योजना से जोड़ कर मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा दिया है।
कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन में लगातार प्रदेश सरकार कामगारों मजदूरों के लिए रोजगार देने के अवसर दे तलाश रही है।
उसी तर्ज पर सरकार ने प्रदेश के कुम्हारों के लिए माटी कला की अलग से योजना बना कर मिट्टी के बर्तन जैसे दिए और कुल्हड़ बनाने के लिए प्रशिक्षण के साथ उपकरण देने का भी कार्य करने जा रही है। जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
राजधानी से सटे बाराबंकी जनपद के कुम्हार सोनू प्रजापति का कहना है कि सरकार योजनाएं चलाती है लेकिन उनका लाभ हम लोगो को नही मिल पाता।
जबसे देश मे चायनीज़ फाइबर प्लास्टिक का समान आने से हालात बिगड़ गए इसके साथ ही बर्तन बनाने के लिए मिट्टी की मिलने की समस्या रहती है।
कोरोना काल में मजदूरों कामगारों के रोजगार पूरी तरह से ठप हो गए थे जिसको देखते हुए सरकार ने कुम्हारों को जून से अगस्त तक ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्रेनिंग कैंप का आयोजन करेगी जिससे उनके द्वारा बनाये गए दीपक से उनके जीवन में दीपक उजाला ला सकें।
कुम्हार बृजेश प्रजापति का कहना है लॉक डाउन में सारा काम ठप था बंदी के चलते कोई काम नही था प्लास्टिक, फाइबर के चलते मिट्टी के बर्तन की मांग कम रहती है।
चाइनीज़ मूर्तियों को व उत्पादकों से टक्कर लेने के लिए माटी कला योजना के तहत कामगारों को सरकार पग मिल, इलेक्ट्रिक चाक, दीपक बनाने वाली मशीन और मार्डन डिजाइन की डाई मुफ्त उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है।
जिसको लेकर विभाग के अधिकारी विनोद कुमार श्रीवास्तव का कहना है सरकार द्वारा चलाई गई माटी कला योजना खास कर कुम्हारों में लिए लाई जिसमें कुम्हारों को प्रशिक्षण के साथ निशुल्क उपकरण उपलब्ध कराएं जाएंगे।
कुम्हारों को मिट्टी मिलने की समस्या को दूर करने की लिए विभाग द्वारा ही प्रयास किये जा रहे मिट्टी के लिए पट्टा देना सरकार की प्राथमिकता है।
चाइनीज झालरों और प्लास्टिक से निर्मित गिलासों ने कुम्हारों की कमर तोड़ दी थी। बाजारों में बढ़ते चाइनीज़ समान आने से मिट्टी के बने बर्तनों व कुल्हड़ों की खपत कम हो गई थी।
क्योंकि कोरोना काल में मजदूरों कामगारों के रोजगार पूरी तरह से ठप हो गए थे। सरकार के इस पहल से कुम्हारों को जीवन में कहीं न कहीं रोशनी की किरण दिखी है।