हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन पर हत्यारोपियों को शह देने और नेपाल पहुंचाने में मदद करने का आरोप था।
पकड़े गए आरोपियों के ऊपर 25 हजार रुपये का ईनाम था। नाका थाना पर दोनों के खिलाफ गैंगेस्टर के तहत मुकदमा हुआ था। पुलिस व जांच एजेंसियां कई महीनों से दोनों की तलाश कर रही थी।
हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके घर पर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या को सूरत के ग्रीन व्यू अपार्टमेंट के अशफाक व मोईनुद्दीन ने अंजाम दिया था। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों ही हत्या के आरोपी लखीमपुर खीरी के पलिया गए थे।
वहां मोहम्मद आसिफ रजा व रईस अहमद ने दोनों हत्यारोपियों को शरण दी थी। उनको मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराया और नेपाल तक भागने में मदद की थी। मोहम्मद आसिफ और रईस अहमद ने दोनों हत्यारोपियों को रुपये भी दिए थे।
मोहम्मद आसिफ की पलिया में कार एसेसरीज की दुकान है जबकि रईस की मोबाइल की दुकान है। रईस और आसिफ रजा का संपर्क तहरीके तहाफुज्जे सुन्नियत से भी है।
जांच एजेंसियों ने कमलेश तिवारी हत्याकांड के बाद बरेली और लखीमपुर में छापेमारी की थी। अशफाक व मोईनुद्दीन को नाटकीय ढंग से गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार कर यूपी को सौंपा था।
दोनों से यूपी पुलिस और जांच एजेंसियों ने जब पूछताछ की तो उन्होंने लखनऊ में हत्या के बाद लखीमपुर के पलिया जाने और वहां से नेपाल पहुंचने की बात कबूली थी।
अशफाक व मोईनुद्दीन ने ही बताया था कि उनको पलिया में रईस व मोहम्मद आसिफ ने मदद की थी। जिस मोबाइल फोन से वह अपने घर और कुछ लोगों के संपर्क में था। उसे रईस ने उपलब्ध कराया था।