मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को सीधी जिले की सिंहावल विधानसभा अंतर्गत बहरी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इसी कार्यक्रम में आदिवासी परिवार की बेटी अनामिका बैगा भी पहुंची थी। वह मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी पढ़ाई को लेकर मदद की गुहार लगाना चाहती थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे मंच तक पहुंचने से रोक दिया गया। इससे आहत होकर छात्रा फूट-फूटकर रोने लगी और अपना दर्द मीडिया के सामने बयां किया।
अनामिका बैगा ने भावुक होते हुए कहा कि वह बेहद गरीब परिवार से आती हैं और पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, “मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं। मेरे पापा बहुत गरीब हैं और मुझे आगे पढ़ा नहीं सकते। इसलिए मैं मुख्यमंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि मुझे पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी जाए।” अनामिका ने बताया कि वह आदिवासी बैगा समाज से हैं और अपने क्षेत्र की एकमात्र बच्ची हैं, जो बाहर निकलकर पढ़ाई कर रही है। वह नीट परीक्षा की तैयारी कर रही हैं, लेकिन आर्थिक तंगी उनके सपनों के आड़े आ रही है।
छात्रा ने यह भी बताया कि वह इससे पहले कलेक्टर और सांसद से दो बार मदद की गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन कहीं से कोई सहायता नहीं मिल पाई। उनका कहना था कि उन्होंने विधायक कुंवर सिंह टेकाम से भी कई बार सहायता मांगी, लेकिन उनकी बात पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने अनामिका की पढ़ाई के लिए हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। सीएम ने कहा कि सरकार प्रतिभावान विद्यार्थियों के सपनों को टूटने नहीं देगी और अनामिका भविष्य में एक प्रसिद्ध डॉक्टर बनकर मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस पहल को संवेदनशील और जनहितकारी नेतृत्व की मिसाल माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा सरकार की प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में त्वरित सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बहरी में 201 करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से 209 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी किया था। इस आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
अनामिका बैगा की कहानी ने एक बार फिर यह साबित किया कि सही मंच और संवेदनशील नेतृत्व मिलने पर जरूरतमंदों को राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब अनामिका और उसके परिवार को उम्मीद है कि उसकी डॉक्टर बनने की ख्वाहिश जरूर पूरी होगी।