इस ट्रैक्टर रैली को देश के राजनैतिक समर्थन भी मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के नेता ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि आइए हम सब मिलकर किसानों की ‘ट्रैक्टर परेड’ में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाएं क्योंकि ट्रैक्टर एक प्रतीक है और संदेश भी कि जब देश के छोटे और बड़े पहिये एक साथ चलेंगे तभी सच्चे विकास का चक्का घूमेगा और ये भी कि तरक़्क़ी को सही दिशा अगले छोटे पहिये ही देंगे! जय किसान ~ जय हिंदुस्तान!
आइए हम सब मिलकर किसानों की ‘ट्रैक्टर परेड’ में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाएं क्योंकि ट्रैक्टर एक प्रतीक है और संदेश भी कि जब देश के छोटे और बड़े पहिये एक साथ चलेंगे तभी सच्चे विकास का चक्का घूमेगा और ये भी कि तरक़्क़ी को सही दिशा अगले छोटे पहिये ही देंगे!
जय किसान ~ जय हिंदुस्तान!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 26, 2021
वही कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके ट्रैक्टर रैली को दी शुभकामनाएं देते हुए लिखा किसान विरोधी क़ानून के ख़िलाफ़ निकल रही ट्रेक्टर रैली को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। आप सभी के साहस के हम क़ायल हैं। #किसान_गणतंत्र_दिवस_परेड
किसान विरोधी क़ानून के ख़िलाफ़ निकल रही ट्रेक्टर रैली को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। आप सभी के साहस के हम क़ायल हैं। #किसान_गणतंत्र_दिवस_परेड
— digvijaya singh (@digvijaya_28) January 26, 2021
वही, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार आगामी दो-दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान एक प्रस्ताव पेश करके केंद्र सरकार के नये कृषि कानूनों का विरोध करेगी और उन्हें निरस्त करने की मांग करेगी। यह बात राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री ने सोमवार को कही।
राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि विधानसभा का सत्र 27 जनवरी से शुरू होगा और 28 जनवरी को दूसरे हिस्से के दौरान प्रस्ताव को नियम 169 के तहत पेश किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर दो-ढाई घंटे तक चर्चा होगी। अभी तक पांच गैर-बीजेपी शासित राज्य- पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, केरल और दिल्ली- ने केंद्र सरकार के नये कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी विधानसभाओं में प्रस्ताव पारित किए हैं।
इस ही के साथ आप को बता दी कि सरकार और 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 11वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही थी। दसवें दौर की वार्ता में सरकार ने नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने की पेशकश की थी, लेकिन किसान यूनियनों ने इसे खारिज कर दिया था। सरकार ने सभी किसान संगठनों से 11वें दौर की वार्ता में प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और अपने निर्णय से अवगत कराने को कहा था।