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कृषि हमारी आत्मा, किसान हमारी शक्ति – शिवराज सिंह चौहान का पटना में बड़ा संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बिहार कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार और उपमुख्यमंत्री व पशुपालन एवं मत्स्य पालन मंत्री रेणु देवी की उपस्थिति में किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प दोहराया।

By: RNI Hindi Desk 
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कृषि हमारी आत्मा, किसान हमारी शक्ति – शिवराज सिंह चौहान का पटना में बड़ा संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बिहार कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार और उपमुख्यमंत्री व पशुपालन एवं मत्स्य पालन मंत्री रेणु देवी की उपस्थिति में किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प दोहराया।
इस कार्यक्रम में संबोधित करते हुए चौहान ने कहा, “मैं किसानों का मेहमान नहीं हूँ, बल्कि अनौपचारिक रूप से आपकी समस्याएँ सुनने और समाधान खोजने के लिए यहाँ आया हूँ। अभी मैं गंगा आरती से आ रहा हूँ, और यह कहना चाहता हूँ कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, किसान इसकी आत्मा हैं, और किसानों की सेवा मेरी सबसे बड़ी पूजा है।


उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी ‘राष्ट्र प्रथम’ नीति ने भारतीय कृषि को विदेशी ताकतों से संरक्षण प्रदान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिकों की पहुंच खेतों और गांवों तक होनी चाहिए, ताकि किसानों को नवाचार का लाभ मिले। चौहान ने बिहार के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर शोध किए हैं, जो खेती को नई दिशा दे सकते हैं।केंद्रीय मंत्री ने छोटे जोत वाले खेतों में मशीनीकरण और विज्ञान के हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हमें प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने और कृषि लागत को कम करने की जरूरत है। जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के साथ मिलकर इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे, जैसे खेतों की घेराबंदी। उन्होंने बिहार में मौजूद 3 करोड़ मवेशियों के संरक्षण और उनकी देशी नस्लों के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। चौहान ने छोटे जोत वाले किसानों के लिए खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे वैकल्पिक आजीविका स्रोतों को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो। उन्होंने प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया और सभी से संकल्प लेने का आग्रह किया कि हम केवल स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, ताकि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिले।

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