Home जरूर पढ़े नाइजिरिया: डाकुओं के साथ वो 19 रात, गोलियों की आवाज, मौत सामने खड़ी थी, ऐसी है रामसुंदर की कहानी

नाइजिरिया: डाकुओं के साथ वो 19 रात, गोलियों की आवाज, मौत सामने खड़ी थी, ऐसी है रामसुंदर की कहानी

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Nigeria, the sound of gunfire,

(गोरखपुर से संवाददाता प्रदीप आनंद श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

गोरखपुर से 35 किलोमीटर दूर हरपुर-बुदहट क्षेत्र के सेमरी गांव के रहने वाले राम सुंदर चौहान कुछ समय से मुम्बई स्थित एंग्लो-ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट कंपनी में फिटर पद पर तैनात हैं। नाइजीरिया से लौटते समय 3 दिसंबर को रामसुंदर समेत 18 भारतीयों को समुद्री डाकुओं ने बंधक बनाया लिया था।

डाकुओं के साथ वो 19 दिन की भयानक रात

19 दिन तक पीड़ित भारतीय व्यक्ति नाइजीरियन डाकुओं के चंगुल में रहा। इस पूरी घटना के बारे में खुद पीड़ित व्यक्ति रामसुंदर ने बताया कि तीन दिसंबर को वे लोग क्रूड ऑयल लोड कर नाइजीरिया से शिप से वापस पाराद्वीप, उड़ीसा आ रहे थे। उनके कैप्टन ने बंदरगाह के निदेशक से सुरक्षा मांगी। इसके बाद शिप चल पड़ी और वे लोग अपनी-अपनी केबिन में आकर आराम करने लगे।

नौ समुंद्री डाकुओं ने हाईजैक किया था शिप को

तकरीबन दो घंटे बाद वहां के समयानुसार देर शाम 7:30 बजे माइक पर कैप्टन ने बताया कि शिप हाईजैक हो गई है। सभी लोग डेक पर पहुंचे। वहां नौ समुद्री डाकू पहले से मौजूद थे। 19 सदस्यों को उन्होंने बोट में उतारा। जिसमें 18 भारतीय और एक तुर्की का था।

इसके आगे पीड़ित व्यक्ति ने कहा कि उन लोगों को कब्जे में लेने के लिए डकैतों के तीन गुट आपस में भिड़ गए। सुनसान जंगल गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। नाउम्मीदी के बीच 12 दिसंबर को उम्मीद की डोर मिली। डकैतों ने जब कंपनी के अधिकारियों से हमारी बात फोन पर कराई।

अधिकारियों से बात हुई तो आई जान में जान

पीड़ित व्यक्ति ने कहा कि अधिकारियों ने ढांढस बंधाया, तो लगा कि शायद वे घर लौट सकेंगे। इसके बाद पांच दिन तक फिर कोई बात नहीं हुई। वो हमें खाने को कभी चावल-बीन्स तो कभी नूडल देते रहे हैं। 17 दिसंबर को रिहाई की उम्मीद मिली,  जब उन लोगों को पता चला कि कंपनी ने डकैतों की शर्तें मान ली है। इन उम्मीदों ने सारी थकान दूर कर दी और उन लोगों की वतन वापसी हो सकी।

योगी सरकार का किया धन्यवाद

पीड़ित व्यक्ति- डाकुओं ने उन लोगों को 23 दिसंबर को फिर बोट में बैठाया। करीब छह घंटे के सफर के बाद नाइजीरिया के समुद्र तट पर लाकर छोड़ दिया गया। यहां नाइजीरिया की सेना पहले से ही उन लोगों का इंतजार कर रही थी। इसके बाद सेना उन्‍हें लेकर एयरपोर्ट आई। कंपनी के अधिकारियों के साथ भारत सरकार का और खास कर योगी सरकार भी धन्‍यवाद करते नहीं थक

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