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RSS: देश की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा: आरएसएस की वार्षिक बैठक में भाषा और शताब्दी वर्ष पर व्यापक चर्चा

RSS: आरएसएस की 3 दिवसीय वार्षिक बैठक में शताब्दी वर्ष की तैयारियों, सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्यों, मणिपुर में शांति बहाली, भाषा विवाद पर “सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा” मंतव्य समेत सामाजिक मूल्यों के संरक्षण पर चर्चा हुई, और व्यापक हिंदू सम्मेलन व संपर्क अभियान की योजना तय की गई।

By: RNI Hindi Desk 
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RSS: देश की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा: आरएसएस की वार्षिक बैठक में भाषा और शताब्दी वर्ष पर व्यापक चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत प्रचारकों की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक रविवार को संपन्न हुई, जिसमें संगठनात्मक विषयों के साथ-साथ संघ के शताब्दी वर्ष की योजनाओं और देश के समक्ष खड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में भाषा विवाद पर भी चर्चा हुई, जिसमें आरएसएस ने दोहराया कि “भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा हैं” और लोग पहले से अपनी-अपनी भाषा में शिक्षा ग्रहण करते रहे हैं। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह विचार आरएसएस में लंबे समय से स्थापित है और विविध भाषा-समूहों का सम्मान ही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में मणिपुर की स्थिति पर भी चर्चा की गई, जहां संघ के स्वयंसेवक शांति बहाली के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैतेई समुदाय के बीच आरएसएस की गतिविधियों से सकारात्मक बदलाव आया है और भविष्य में और सुधार होगा। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में संघ कार्यों और स्वयंसेवकों द्वारा की जा रही सुरक्षा पहलों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में संघ शिक्षा वर्गों की समीक्षा की गई। 40 वर्ष से कम आयु के स्वयंसेवकों के लिए 75 शिक्षा वर्ग आयोजित किए गए, जिनमें 17,690 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण लिया। वहीं 40 से 60 आयु वर्ग के लिए 25 शिक्षा वर्ग लगाए गए, जिनमें 4,270 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शताब्दी वर्ष समारोह के संबंध में आंबेकर ने बताया कि हर मंडल और बस्ती में हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जो 1,03,019 स्थानों पर होगा। इसके अलावा 924 जगहों पर नागरिक गोष्ठियों का आयोजन कर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व पर संवाद किया जाएगा। इसी शताब्दी वर्ष में एक व्यापक आउटरीच कार्यक्रम की भी योजना है, जिसके माध्यम से सभी वर्गों, पेशों और विचारधाराओं के लोगों तक पहुंचने और उनके विचार जानने के साथ-साथ संघ के विचार साझा करने का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि इस वर्ष विजयादशमी पर अधिक से अधिक स्वयंसेवक गणवेश में शामिल होंगे। साथ ही पंच निष्ठा के तहत पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण, जीवन में संतुलित प्रगति, और तकनीकी विकास के बीच परंपरागत जीवनशैली के संतुलन पर भी चर्चा की गई।

इसके अलावा बैठक में अमेरिका और बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों व हिंदुओं पर हुए हमलों, अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, ऑपरेशन सिंदूर और आपातकाल जैसे संवेदनशील विषयों का भी उल्लेख हुआ। हालांकि इन मुद्दों पर कोई नई रणनीति तय नहीं हुई। आंबेकर ने स्पष्ट किया कि इस बार बैठक का मुख्य फोकस शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर ही था।

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