उत्तराखंड में पंचायत चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने एक प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड हाई कोर्ट की फटकार के बाद पंचायत चुनाव कराने को मजबूर हुई है, वरना सरकार की मंशा इन्हें टालने की थी।
धस्माना ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करते हुए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पहले नगरीय निकाय चुनावों में गड़बड़ी की गई और अब वही हाल पंचायत चुनावों में भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने रानीखेत विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां भाजपा विधायक प्रमोद नैनवाल के पूरे परिवार का नाम पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में दर्ज है, जो पूरी पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उन्होंने नैनीताल और अल्मोड़ा जिलों का हवाला देते हुए कहा कि वहां कई भाजपा नेताओं के नाम दो-दो स्थानों पर दर्ज हैं। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
गन्ना समितियों में राजनीतिक हस्तक्षेप और कब्जा जमाने का भी आरोप लगाया गया। धस्माना ने कहा कि इन समितियों को भाजपा ने अपने हित साधने का जरिया बना लिया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार आपदा के समय में पंचायत चुनाव करवा रही है, जब ग्रामीण क्षेत्र बाढ़ और भूस्खलन की मार झेल रहे हैं। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार ने कोर्ट में बरसात को लेकर कोई ठोस और तथ्यात्मक तर्क नहीं दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्राम पंचायत सदस्य पद पर नामांकन प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर नामांकन फार्म समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए या जानबूझकर उम्मीदवारों को गुमराह किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कांग्रेस बूथ स्तर पर आंदोलन छेड़ेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।
धस्माना ने यह भी कहा कि कांग्रेस राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की पक्षधर है, लेकिन भाजपा सरकार ने सत्ता के दुरुपयोग से लोकतंत्र की नींव को ही हिला कर रख दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग से भी मांग की कि वह स्वतंत्र जांच कराए और सभी गड़बड़ियों को दूर करे ताकि मतदाताओं का भरोसा कायम रह सके।