चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूची को और अधिक सटीक व अद्यतन बनाने के लिए चल रही SIR प्रक्रिया के तहत उत्तराखंड में महत्वपूर्ण कार्यक्रम घोषित किया है। इसके अनुसार राज्य में यह विशेष अभियान 8 जून 2026 से शुरू होगा और 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक व्यापक अभियान है, जिसका उद्देश्य है नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना, वोटर लिस्ट में गलतियों को सुधारना और पूरी मतदाता सूची को पारदर्शी और अपडेट करना।
इस तरह की प्रक्रिया पहले भी कई राज्यों में चरणबद्ध तरीके से की जा चुकी है। हाल ही में देश के कई हिस्सों में SIR के विभिन्न चरण चलाए गए हैं, जिनमें लाखों मतदाताओं के नाम अपडेट किए गए हैं।
चुनाव आयोग की योजना के अनुसार उत्तराखंड में प्रक्रिया इस तरह चलेगी:
* 8 जून 2026: घर-घर सत्यापन की शुरुआत
* बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं की जानकारी जांचेंगे
* नए वोटरों के फॉर्म भरवाए जाएंगे
* मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नाम हटाए जाएंगे
* 2003 या पुराने आधार वोटर रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है
* पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड में जिनका डेटा मेल नहीं खाता पर खास ध्यान दिया जाएगा
*15 सितंबर 2026:अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित
मतदाताओं को अपने- अपने नाम की पुष्टि करनी होगी साथ ही अपने आवश्यक दस्तावेज BLO को देने होंगे और यदि नाम सूची में नहीं है तो फॉर्म भरकर जोड़ना होगा
SIR का तीसरा चरण 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटि-रहित बनाना है
और कई राज्यों में BLO सर्वे पहले ही शुरू हो चुका है
*फर्जी या गलत वोटिंग को रोक सकते है।
*नए योग्य मतदाताओं को जोड़ सकते है।
*चुनावी सूची को अपडेट कर सकते है।
*लोकतंत्र को अधिक मजबूत बना सकते है।
उत्तराखंड में 8 जून से शुरू होने वाला SIR अभियान राज्य की मतदाता सूची को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 15 सितंबर को जारी होने वाली अंतिम सूची यह तय करेगी कि आगामी चुनावों में कौन-कौन मतदान के योग्य होंगे।