{ स्वतंत्र पत्रकार प्रणव गोस्वामी की कलम से }
कुछ पोस्टर महज पोस्टर नहीं होते हैं, वो इंसान के भीतर दबी हुई खतरनाक मंशा का स्वरुप हो सकते है वही किसी विचारधारा के प्रतीक भी लेकिन कई बार हमें इन पोस्टर्स से कोई फर्क नहीं पड़ता है और यही कारण है कि इन पोस्टर्स के माध्यम से अब देश में एक ऐसी लड़ाई का एलान कर दिया गया है जिसे हमें समझना होगा वरना भविष्य में इसके गंभीर परिणाम होंगे।

दरअसल दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 1 महीने से नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और अदृश्य राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को ले कर विरोध हो रहा है, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं वैसे वैसे इनका असली चेहरा सामने आ रहा हैं, पिछले एक महीनें से आम जनता को परेशान करते हुए ये आंदोलनकारी एक ऐसे कानून का विरोध कर रहे हैं जिसका इस देश के लोगों से कोई लेना देना नहीं है।
बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर जश्न-ए -शाहीन के नाम से एक पोस्टर शेयर किया है जिसमें उन्होंने 19 जनवरी को दिल्ली के लोगों से शाहीन बाग़ पहुंचने का एलान किया हैं लेकिन वो ये भूल जाती है कि 19 जनवरी का दिन देश के लिये जश्न मनाने का नहीं है बल्कि वो काला दिन है जब घाटी से लाखों कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से मारकर बाहर निकाल दिया था।
अलगाववादियों ने पुरे कश्मीर में जातिसंहार किया। पूरे के पूरे समुदाय को मारकर, लूटकर, यातना देकर भगा दिया और आज तक किसी को भी किसी भी अपराध की सजा तो दूर उस पर मुकदमा चलाकर उसका दोष भी सिद्ध नहीं हुआ है लेकिन स्वरा भास्कर जैसे लोग कश्मीरी पंडितों के जख्म पर नमक छिड़कने के लिये 19 जनवरी को जश्न -ए -आज़ादी जैसा कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
जिन कश्मीरी पंडितों को उनके ही घरों से बेघर किया गया, मस्जिदों से जिन्हे घाटी छोड़ने का फरमान सुनाया गया हो, जिनकी महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया हो वो काली तारीख देश के लिए जश्न कि तारीख कैसे हो सकती हैं ? आखिर स्वरा भास्कर इस पोस्टर के माध्यम से क्या कहना चाह रही हैं ? उनकी मंशा क्या हैं ? बात जो भी हो लेकिन इस पोस्टर के माध्यम से एक अदृश्य एलान तो उन्होंने कर दिया है जिसके भविष्य में गंभीर परिणाम होंगे।