सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है । कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पटाखों पर पूरा प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है और इसके लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर पटाखा निर्माता नियमों का पालन करते हैं तो उन्हें पटाखे बनाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन नागरिकों के सांस लेने के अधिकार का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने NEERI और PESO से परमिट प्राप्त ग्रीन पटाखों के निर्माण की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक ये पटाखे दिल्ली-एनसीआर में नहीं बेचे जाएंगे। केवल वही निर्माता ग्रीन पटाखे बना सकते हैं जिनके पास प्रमाणपत्र हो, जो अधिकृत एजेंसियों से जारी किया गया हो। निर्माता को लिखित वचन देना होगा कि वे क्षेत्र में पटाखों की बिक्री नहीं करेंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरी तरह का बैन समस्याएं पैदा कर सकता है और माफिया इस अवसर का फायदा उठा सकते हैं। इसलिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सावधानी बरतने की भी हिदायत दी। कोर्ट ने यह निर्णय दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया है। पिछले साल नवंबर में राजधानी का औसत AQI 494 तक पहुंच गया था, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिवाली से ठीक पहले सुनाया है, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी, जिसमें कोर्ट यह तय करेगा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर आगे क्या कदम उठाए जाएं। यह निर्णय प्रदूषण नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा के संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है।