नई दिल्ली : सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान तकरीबन दो महीनों से सड़कों पर है, और अपनी मांग पर डटे हुए है। वहीं सरकार है इन कानूनों में संशोधन की बात कह रही है, जिससे ये स्पष्ट हैं कि सरकार इस कानून को वापस लेने की मूड में नहीं है। आपको बता दें कि अभी तक सरकार और किसानों के बीच कुल 9 वार्ता हो चुके है, लेकिन अभी तक इसका कोई नतीजा नहीं सका है। नतीजा निकला भी हैं तो क्या एक और डेट, जो 19 जनवरी को तय है।
वहीं दूसरी तरफ किसान अपनी सुनियोजित तरीकों के जरिये ट्रैक्टर रैली की तैयारी में लगे हुए है। जिसे लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह पूरा मामला दिल्ली पुलिस के पाले में डाला है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस को उनकी शक्ति भी याद दिलाई। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि क्या अब हमें प्रशासन को उसकी शक्तियों को बारे में बताना होगा, ये फैसला लेना दिल्ली प्रशासन के हाथ में हैं की वो किसान द्वारा ट्रैक्टर रैली को अनुमति देती हैं या नहीं।
सर्वोच्च अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रामलीला मैदान में प्रदर्शन की इजाजत पर पुलिस को फैसला करना है। साथ ही अदालत ने कहा कि शहर में कितने लोग, कैसे आएंगे ये पुलिस तय करेगी। वहीं उन्होंने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए बुधवार यानी 20 जनवरी का डेट निर्धारित किया हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले की सुनवाई कर रहा है, जहां अदालत ने एक कमेटी का गठन किया है। जिसमें अब सिर्फ तीन सदस्य ही बचे हैं, वहीं किसान कोर्ट के इस कमेटी को लेकर कोर्ट का रूख कर चुका है। क्योंकि उनका कहना हैं कि इसमें से अधिकतर सदस्य कृषि कानून के समर्थन में है।