गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब टकराव की स्थिति तक पहुंच गया है। 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने धरना दे रहे छात्रों ने मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इसी दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रॉक्टर वेदप्रकाश राय के बीच बातचीत के दौरान विवाद हो गया।
छात्रों से बातचीत करने पहुंचे असिस्टेंट प्रॉक्टर वेदप्रकाश राय के साथ किसी मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई। स्थिति बिगड़ने पर छात्रों ने असिस्टेंट प्रॉक्टर को वहां से दौड़ाया। मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्डों ने बीच-बचाव कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद कुछ समय तक विश्वविद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
छात्र नेता 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष समस्याएं रखे जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की है। छात्र नेता सतीश प्रजापति ने कहा कि उन्हें नए कुलपति से समस्याओं के समाधान की उम्मीद है। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में निष्कासित किए गए छात्रों की बहाली शामिल है। छात्र नेताओं का कहना है कि छात्र हित से जुड़े मुद्दे उठाने वाले छात्रों के खिलाफ की गई निष्कासन की कार्रवाई वापस ली जानी चाहिए और उन्हें पढ़ाई जारी रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय से चुनाव नहीं हुए हैं, जबकि छात्रों से छात्रसंघ शुल्क लिया जा रहा है। इसी व्यवस्था को लेकर छात्रों ने सवाल उठाते हुए जल्द चुनाव कराने की मांग की है।
छात्रों ने विश्वविद्यालय में कार्यरत परीक्षा एजेंसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इसके अलावा डिग्री और अंकपत्र के नाम पर छात्रों से कथित रूप से धन लिए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। छात्रों का कहना है कि किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर भी छात्र नेताओं ने नाराजगी जताई है। उनकी मांग है कि मेस की व्यवस्था बेहतर की जाए और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
छात्र नेताओं ने पीएम-उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय में चल रहे कार्यों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि योजना से जुड़े कार्यों, आवंटन और अन्य प्रक्रियाओं की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।
फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है और वे अपनी मांगों पर कायम हैं। दूसरी ओर, असिस्टेंट प्रॉक्टर के साथ हुए विवाद को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। छात्रों की मांगों, प्रशासन के रुख और हालिया विवाद के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।