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शेयर बाजार में तूफानी तेजी: सेंसेक्स 1,400 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी 24,350 के पार; कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों में उत्साह

5 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 1,400 अंकों से अधिक उछला और निफ्टी 24,350 के पार पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी चुनाव के नतीजों से निवेशकों का उत्साह बढ़ा। बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी शेयरों में जोरदार खरीदारी हुई।

By: Nivedita 
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शेयर बाजार में तूफानी तेजी: सेंसेक्स 1,400 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी 24,350 के पार; कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों में उत्साह

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को जोरदार तेजी देखने को मिली। सप्ताह के पांचवें कारोबारी सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,400 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 24,350 के स्तर के पार पहुंच गया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी सफलता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट ने घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। बाजार खुलते ही खरीदारी का माहौल बन गया। बैंकिंग, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में विशेष तेजी दर्ज की गई। बाजार की इस तेजी ने लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त का सिलसिला जारी रखा।

सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल

गुरुवार को शेयर बाजार की शुरुआत बड़े अंतर के साथ सकारात्मक रही। पिछले कारोबारी दिन यानी बुधवार को सेंसेक्स 77,301.40 अंक पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 78,910.94 अंक पर खुला। वहीं निफ्टी 50 ने भी पिछले बंद स्तर 23,960.60 के मुकाबले 24,378.05 अंक पर कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में लगभग 1,300 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और आगे तेजी का रुख बना रहा। निफ्टी में भी 350 से अधिक अंकों की मजबूती देखने को मिली। बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी के चलते मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहारा

शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का सस्ता होना रहा। ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 8.7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 8.3 प्रतिशत टूटकर 88.12 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। भू-राजनीतिक परिस्थितियों में संभावित सुधार से वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि कच्चे तेल में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत के रूप में देखा गया।

अमेरिकी चुनाव के नतीजों का वैश्विक बाजार पर असर

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत चुनावी सफलता के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। बुधवार को अमेरिकी बाजार में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 3.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसमें 1,569 अंकों की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा S&P 500 में 1.58 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 1.44 प्रतिशत की बढ़त रही। अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम के साथ ईरान के साथ जारी संघर्ष में संभावित नरमी की उम्मीदों ने भी वैश्विक निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया। इसका असर एशियाई बाजारों और भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।

 

 

बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

गुरुवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में तेजी देखने को मिली। फाइनेंशियल सर्विसेज, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और रियल्टी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी और ऑटो सेक्टर में करीब 2.5 प्रतिशत तक की मजबूती दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी, एफएमसीजी, मेटल, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के कुछ शेयरों में कमजोरी रही। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में तेजी व्यापक थी, हालांकि सभी सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।

भारतीय रुपये को भी मिली मजबूती

शेयर बाजार की तेजी के साथ भारतीय मुद्रा में भी सुधार देखने को मिला। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.65 के स्तर पर बंद हुआ रुपया गुरुवार को मजबूत होकर लगभग 94.36 प्रति डॉलर पर खुला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और एशियाई मुद्राओं में मजबूती को रुपये के लिए सकारात्मक कारक माना गया। तेल आयात पर निर्भरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारत की विदेशी मुद्रा संबंधी जरूरतों पर भी राहत दे सकती है।

निवेशकों के लिए आगे क्या रहेंगे महत्वपूर्ण संकेत?

बाजार में आई इस तेज बढ़त के बावजूद निवेशकों के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अचानक आई बड़ी तेजी के बाद कुछ शेयरों में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। निफ्टी के लिए 24,350 से 24,450 का दायरा तत्काल महत्वपूर्ण स्तर माना जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती बाजार में आगे की तेजी का संकेत दे सकती है, जबकि निवेशकों को वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखनी होगी। कुल मिलाकर, 5 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की अहम भूमिका रही। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित होती रहेगी।

 

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