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गुड हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद मरीज भर्ती करने का दावा

बुरहानपुर के गुड हॉस्पिटल पर लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद मरीज भर्ती करने और आयुष्मान योजना के नाम पर गुमराह करने के आरोप लगे हैं। सीएमएचओ ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है।

By: BS Yadav 
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गुड हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद मरीज भर्ती करने का दावा

बुरहानपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के गुड हॉस्पिटल पर आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्थायी लाइसेंस निरस्त किए जाने और नए मरीज भर्ती नहीं करने के निर्देशों के बावजूद अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान योजना के नाम पर गुमराह करने तथा नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में पाई गई खामियों के चलते गुड हॉस्पिटल का अस्थायी लाइसेंस एक माह के लिए निरस्त कर दिया था और नए मरीजों को भर्ती नहीं करने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद अस्पताल में मरीज भर्ती किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि उन्हें पहले मुफ्त इलाज का भरोसा देकर भर्ती किया गया, लेकिन बाद में आयुष्मान कार्ड लाने के लिए कहा गया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें गलत जानकारी देकर भर्ती कराया।

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खंडवा क्षेत्र से इलाज के लिए आए मरीज कैलाश ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों को छोटे कमरों में जमीन पर लिटाकर उपचार किया जा रहा है। वहीं कुछ मरीजों ने शिकायत की कि कई दिनों तक उन्हें केवल आईवी लगाकर रखा गया और छुट्टी मांगने के बावजूद समय पर डिस्चार्ज नहीं किया गया।

मरीज के परिजन सुमित वारूडे ने आरोप लगाया कि सामान्य बीमारी को गंभीर बताकर आयुष्मान योजना के तहत अधिक राशि के बिल बनाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि मरीजों को भ्रमित कर अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है।

वहीं, अस्पताल के डायरेक्टर विनोद सुगंधी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अस्पताल में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और आयुष्मान योजना के नियमों के तहत ही मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल नहीं है।

उधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राजेंद्र वर्मा ने स्वीकार किया कि अस्पताल का अस्थायी लाइसेंस एक माह के लिए निरस्त किया गया था और नए मरीज भर्ती नहीं करने के निर्देश भी दिए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि आदेशों का उल्लंघन पाया जाता है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिका हुआ है। एक ओर मरीज और उनके परिजन गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
राजू सिंह राठौड़ की रिपोर्ट

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