महाराष्ट्र के पुणे में एक पुरस्कार समारोह के दौरान पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को लेकर दिए गए शिवसेना नेता संजय राउत के एक बयान के बाद सियासी घमासान मच गया है। संजय राउत ने कहा था कि, पूर्व पीएम इंदिरा गांधी पायधुनी (दक्षिण मुंबई का इलाका) में करीम लाला से मिलने आती थी। राउत ने यह भी दावा किया कि हाजी मस्तान के मंत्रालय में आने पर पूरा मंत्रालय उसे देखने के लिए नीचे आ जाता था। संजय राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
आपको बता दें कि, इस समारोह के दौरान संजय राउत ने यह भी कहा था कि, कभी अंडरवर्ल्ड के लोग तय करते थे कि पुलिस कमिश्नर कौन बनेगा और मंत्रालय में कौन बैठेगा। राउत ने कहा कि, वो अंडरवर्ल्ड के दिन थे। बाद में हर कोई (डॉन) देश छोड़कर भाग गया, अब ऐसा कुछ भी नहीं है। शिवसेना नेता संजय राउत के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम औऱ मिलिंद देवड़ा ने राउत से बयान वापस लेने की मांग की थी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों शिवसेना नेता संजय राउत इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं? इसके पीछे की वजह क्या है? वह क्यों अपनी ही पार्टी लाइन से हटकर इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं? इसके पीछे तमाम तरह के कारण हैं जिसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। दरअसल पिछले साल के आखिर में महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस, एनसीपी के बीच गठबंधन की सरकार बनीं थी और इस सरकार में संजय राउत को यह उम्मीदें थी कि, उनके भाई को राज्य की कैबिनेट में जगह दी जाएगी। लेकिन सरकार के गठन के समय ऐसा नहीं हुआ, जिसके बाद से संजय राउत इस तरह की बयानबाजी लगातार कर रहे हैं।
दरअसल संजय राउत ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की करीम लाला से होने वाली मुलाकात को लेकर तंज किया था कि, वो भी एक वक्त था जब राजनीतिक पार्टी के शीर्ष नेता करीम लाला जैसे लोगों से मुलाकात करते थे। इतना ही नहीं राज्य में सरकार के गठन में भी उनकी बात मानीं जाती थी। लेकिन अब ऐसा कुछ भी नहीं है। इसी बात को लेकर कांग्रेस ने संजय राउत पर इस बयान को वापस लेने के लिए दवाब डालने लगी।
लेकिन सबसे अहम बात यह है कि करीम लाला कौन थे? जिससे पूर्व पीएम इंदिरा गांधी मिलती थी। उनका राजनीतिक रसूख क्या था? क्या वाकई में संजय राउत जो कह रहे हैं उसमें कुछ सच्चाई है। जैसे तमाम सवाल हैं जिसके बारे में जानना जरूरी है। लेकन सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि करीम खान कैसे करीम लाला बनें।
करीम खान से करीम लाला बननें की कहानी
दरअसल करीम खान जिस गली में रहते थे वहीं पर उन्होंने जुए का एक अड्डा खोलने के साथ अपनी शुरूआत की। जिसे सभ्य जुबान में ‘सोशल क्लब’ के नाम से जाना जाता था। क्लब में हर तरह के लोग आते थे- निहायत ही गरीब लोगों से लेकर उनलोगों तक जिनकी जेबें गरम होती थी, जो लोग पैसा गंवाने की कूबत रखते थे और वो भी जो जिंदा बनें रहने के लिए जूझ रहे होते थे। दैनिक वेतनभोगी और मध्यवर्ग के लोग भी इस ‘सोशल क्लब’ में शिरकत करने आते थे। इस जूए के अड्डे पर जो लोग भारी भरकम रकम हार जाते थे वो अपने घर की राशन और दूसरी जरूरत की पूर्ति के पैसे करीम खान से उधार लेते थे।
लेकिन जब खान ने गौर किया कि यह एक ढर्रा सा बन गया है तो उसने उसपर पाबंदी लगाने का फैसला करते हुए उधार लेने वालों से कहा कि, उन्हें उधार ली गई रकम पर हर महीने की 10 तारीख को सूद देना होगा। इससे कुछ लोग हतोत्साहित तो हुए लेकिन बाकि लोगों को इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ा। इसके बाद खान ने गौर किया कि उसकी तिजोरी हर महीने 10 गुना फलफूल रही है और इससे उत्साहित होकर उसने साहूकार या फिर लाला बनने का फैसला किया। इस तरह करीम खान को ‘करीम लाला’ के नाम से जाना जाने लगा।
संजय राउत के खुलासे के बाद करीम लाला का पोता सामने आया है राउत के बयान पर अपनी मुहर लगाते हुए कहा कि, इंदिरा गांधी, करीम लाला से मिला करती थी। करीम लाला के ऑफिस में इंदिरा के साथ मुलाकात की तस्वीरें भी है।