नई दिल्ली : कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक नर्स डॉक्टर को थप्पड़ मारते नजर आती है। वहीं डॉक्टर भी जवाब में एक तमाचा जड़ देता है। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों के हस्तक्षेप से इस बढ़ते मामले को रोका जाता है। हालांकि इस वीडियो की जांच के बाद डॉक्टर की सेवा समाप्त कर दी जाती है, लेकिन बाद में फिर उनकी तैनाती दे दी गई थी।
जिसके बाद डॉक्टर बीएम नागर का शव संदिग्ध हालात में उनके सरकारी में मिला। इस घटना के बाद पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। मौके पर स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर पहुंच गए। इसके बाद सीएमएस ने डॉक्टर का शव प्राइवेट एंबुलेंस से उनके पैतृक गांव भिजवाने की कोशिश की, लेकिन तभी पुलिस आ गई और शव को सरकारी आवास पर ही रखा गया।
घटना के बाद डॉक्टर ने बताया था जान को खतरा
बाद में डॉक्टर बीएम नागर के परिजन भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने एसपी को लिखित में दिया कि वे शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते हैं। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को सौंपे जाने के बाद प्रशासन पर सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि कुछ दिनों पहले ही डॉक्टर बीएम नागर ने अपनी जान को खतरा बताया था।
गौरतलब है कि दो हफ्ते पहले जिला अस्पताल में डॉक्टर बीएम नागर और एक नर्स में कहासुनी हुई थी। इस दौरान नर्स ने डॉक्टर को फिर डॉक्टर ने नर्स को थप्पड़ मारा था। इस मामले की रामपुर डीएम ने जांच कराई थी। फिर डॉक्टर की सेवा समाप्त कर दी गई थी और नर्स को सस्पेंड कर दिया गया था।
थप्पड़बाजी की घटना के बाद डॉक्टर बीएम नागर ने पुलिस अधीक्षक शुगन गौतम को चिट्ठी लिखकर अपनी जान को खतरा बताया था। अब उनकी संदिग्ध हालात में मौत पर बवाल शुरू हो गया है। वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस आरके मित्तल ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये नेचुरल मौत लग रही है, उनका बीपी-शुगर भी काफी बढ़ जाता था।
वहीं इस मामले पर एडिशनल एसपी डॉ. संसार सिंह ने कहा कि डॉक्टर के परिजनों के अनुसार उनको शुगर और हार्ट की दिक्कत थी, उनका इलाज भी चलता रहता था, उनके साथी डॉक्टरों और परिजनों ने लिखित में दिया है कि ये स्वाभाविक मौत है, किसी पुलिस कार्यवाही की ज़रूरत नहीं है। अब खबरों पर गौर करें तो जिस प्रकार से शव को पहले बिना परिजनों के आये ही उनके पैतृक आवास भेजा जा रहा था, फिर पुलिस द्वारा मौके पर पहुंच जाने के बाद शव को सरकारी आवास पर ही रखें जाने के बाद परिजनों का सरकारी आवास पर पहुंचना औऱ बिना किसी जांच और बिना पोस्टमार्टम के बॉडी को ले जाने के लिए परिजनों द्वारा लिखित में देना मामले को उलझाता नजर आता है। हालांकि अब जब इस मामले में परिजनों को जांच करवाना ही नहीं है तो अब रामपुर पुलिस भी इस बाबत कुछ नहीं कर सकती।