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राहुल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा सरकार किसानों को भटकाने की कर रही कोशिश

By: RNI Hindi Desk 
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राहुल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा सरकार किसानों को भटकाने की कर रही कोशिश

केंद्र सरकार के नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 55वां दिन है। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं। इस बीच किसान संगठनों और सरकार के बीच आज होने वाली बैठक टल गई है।

इस बीच दिल्ली स्थित कांग्रेस पार्टी ने अपने मुख्यालय में आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृषि कानूनों पर ‘खेती का खून तीन काले कानून’ बुकलेट जारी किया। साथ ही कांग्रेस नेता राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा आज हमारे देश में एक त्रासदी सामने आ रही है, सरकार इस त्रासदी को अनदेखा करना चाहती है, यह लोगों को गलत समझना चाहती है लेकिन सच्चाई यह है कि एक बड़ी त्रासदी सामने आ रही है।

उन्होंने आगे कहा हम जो देख रहे हैं, उद्योग में उद्योग के बाद यह पूरे देश में हवाई अड्डों, बुनियादी ढाँचे, दूरसंचार, खुदरा, जो हम देख रहे हैं, वह इस देश में बड़े पैमाने पर एकाधिकार का विकास है। 3-4-5 लोग अब इस देश के मालिक हैं।

राहुल गाँधी बोले यह देश अब उन लोगों के एक सीमित समूह के स्वामित्व में है, जिन्हें मैं क्रोनी कैपिटलिस्ट के रूप में कहता हूं, जिनका पीएम के साथ घनिष्ठ संबंध है और जो मीडिया समर्थन के साथ पीएम प्रदान करते हैं।

उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा भारत में सबसे बड़ा व्यवसाय कृषि है, हमारे 60% लोग कृषि में हैं और मूल्य के मामले में, कृषि अब तक की सबसे बड़ी हिट है। कृषि केवल खेत नहीं उगाती है, यह मशीनरी है जो उत्पादन करती है, यह कैसे बेचा जाता है।

राहुल गाँधी बोले एकाधिकार द्वारा संरक्षित अंतिम गढ़ को उखाड़ फेंका जा रहा है। 3 नए कानून पारित किए गए हैं, वे भारतीय कृषि को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, मंडियों को नष्ट करके, आवश्यक वस्तु अधिनियम को नष्ट करके और यह सुनिश्चित करके कि कोई भी भारतीय किसान अदालत में नहीं जा सकता है।

गाँधी ने आगे कहा देश खुद समझ नहीं पा रहा है कि क्या हो रहा है। इसका परिणाम यह है कि 3-4 लोग पूरी कृषि प्रणाली के मालिक होने जा रहे हैं। किसानों को वह मूल्य नहीं मिलेगा जिसके वे हकदार हैं, मंडी प्रणाली नष्ट हो जाएगी।

राहुल गाँधी ने अपने सम्बोधन में आगे कहा 3-4 व्यवसायी लाखों और लाखों टन गेहूं, चावल, अन्य आवश्यक वस्तुओं और मेरे दोस्तों को मध्य वर्ग में स्टोर करने में सक्षम होंगे, आप उन कीमतों का भुगतान करेंगे जिनकी आपने कभी कल्पना नहीं की थी।

उन्होंने आगे कहा एपीएमसी के कारण आने वाला चावल, जो गेहूं आप खरीदते हैं, वह उसी दर पर आता है, इसलिए यह किसानों पर हमला नहीं है, यह मध्यम वर्ग और प्रत्येक युवा पर हमला है, जो नौकरी नहीं पा सकेगा।

राहुल बोले यह वही है जो मैं युवाओं को बताना चाहता हूं, महसूस करें कि आपकी स्वतंत्रता छीन ली जा रही है, यह महसूस करें कि यह पहले हुआ था और हमने यह लड़ाई लड़ी और आज जो कुछ भी हमारे पास है वह उस लड़ाई के कारण है जो हमने लड़ी थी और ठीक यही हाल भारत का हो रहा है, आज

राहुल बोले अगर आप पिछले 6-7 साल को देखें तो हर इंडस्ट्री में उन्हीं चार-पाँच लोगों का एकाधिकार बन रहा है। एयरपोर्ट या टेलीकॉम देखिए, जहां भी आप देखेंगे तो इन्हीं लोगों का एकाधिकार है।

उन्होंने कहा इस देश के 4-5 नए मालिक है। आज तक खेती में एकाधिकार नहीं था। आज तक हिंदुस्तान के खेतों का फायदा किसानों, मजदूरों, मिडिल क्लास और गरीबों को जाता था।

गाँधी बोले कैसे एक पूरा ढांचा था जो इन लोगों की रक्षा करता था। उसमें मंडियाँ और आवश्यक वस्तु अधिनियम शामिल था, लीगल सिस्टम शामिल था। ये तीन कानून खेती में एक बार फिर से आज़ादी से पहले वाली हालत करने जा रहे हैं।

उन्होंने अपने सम्बोधन में आगे कहा 4-5 लोगों के हाथ में पूरे कृषि हिंदुस्तान की खेती का ढांचा नरेंद्र मोदी जी दे रहे हैं। इसलिए किसान बाहर सड़कों पर खड़े हैं।

उन्होंने आगे कहा हमारे मिडिल क्लास भाइयों और युवाओं को समझना होगा कि किसान अपनी रक्षा नहीं कर रहे हैं बल्कि वो आपकी और आपके भोजन की रक्षा कर रहे हैं।

राहुल बोले हम सभी को किसानों को अपना पूरा का पूरा समर्थन देना है। ये हिंदुस्तान की सच्चाई है।

उन्होंने आगे कहा सरकार और उनका अहंकार समझता है कि किसानों को थकाया जा सकता है, उन्हें बेवकूफ बनाया जा सकता है। किसानों को ना तो थकाया जा सकता है, ना उन्हें बेवकूफ बनाया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा प्रधानमंत्री से ज्यादा समझ हिंदुस्तान के किसान को है कि क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है। यही सच्चाई है और इसका एक ही उपाय है कि इन तीन काले क़ानूनों को वापस लेना पड़ेगा।

राहुल ने आगे कहा सरकार किसानों को भटकाने की कोशिश कर रही है। सरकार किसानों से कह रही है कि, बात करिए हमसे। 9-10 बार की बातचीत हो चुकी है लेकिन सरकार इसे घसीटते जा रही है।

उन्होंने कहा राहुल गांधी कौन है? क्या करता है? यह बात हिंदुस्तान का हर किसान जानता है। किसान जानता है कि भट्टा परसोल में कौन खड़े थे, भूमि अधिग्रहण के समय नड्डा जी या मोदी जी नहीं बल्कि ‘राहुल गांधी’ किसानों के साथ खड़ा था।

केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के अंदरूनी इलाकों से आए हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन पर बैठे हैं। वे हरियाणा की सिंघु, टिकरी सीमा और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर और चिल्ला सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। किसानों के इस आंदोलन को कई संगठनों और राजनितिक दलों का समर्थन मिल चुका है।

कड़ाके की ठंड के बाद भी विरोध-प्रदर्शन कर रहें प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक तीनों काले कानून वापस नहीं लिए जाते हम यहीं बैठे रहेंगे। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए। किसानों ने 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को दिल्ली में किसान परेड निकालने की चेतावनी दी है।

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