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पलेरा में निजी कोचिंग सेंटरों पर उठे सवाल, सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर विवाद

पलेरा क्षेत्र में बिना पंजीयन और नियमों के विपरीत संचालित हो रहे निजी कोचिंग सेंटरों को लेकर विवाद बढ़ गया है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कुछ सरकारी शिक्षक और कर्मचारी निजी कोचिंग चला रहे हैं, जबकि नियमों के तहत सरकारी शिक्षकों को निजी ट्यूशन पढ़ाने की अनुमति नहीं है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर लोगों ने प्रशासन से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

By: Nivedita 
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पलेरा में निजी कोचिंग सेंटरों पर उठे सवाल, सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर विवाद

टीकमगढ़ जिले के पलेरा क्षेत्र में संचालित निजी कोचिंग सेंटरों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि नगर में कई कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के संचालित किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर शिक्षा को व्यवसाय का रूप दिया जा रहा है।

सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों पर लगे गंभीर आरोप

क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ सरकारी शिक्षक और अन्य शासकीय कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निजी कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि कई संस्थान रिश्तेदारों या परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित किए जा रहे हैं। इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले भी हुई शिकायतें, कार्रवाई नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में शिक्षा विभाग और प्रशासन को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नागरिकों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर संरक्षण देने के आरोप भी लगाए हैं। अब एक बार फिर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद नहीं रुका मामला

जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिए गए थे कि सरकारी शिक्षकों से लिखित प्रमाण लिया जाए कि वे निजी ट्यूशन या कोचिंग का संचालन नहीं करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गए।

क्या कहते हैं नियम ?

शिक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार सरकारी शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन पढ़ाना प्रतिबंधित माना गया है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत भी सरकारी शिक्षकों के निजी ट्यूशन में शामिल होने पर रोक का प्रावधान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक अपने पद का उपयोग निजी आर्थिक लाभ के लिए न करें।

सुरक्षा और मानकों की जांच की मांग

अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि संस्थान भवन सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं और वैधानिक मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। लोगों का मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

 

 

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