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सिर्फ मारपीट ही नहीं, बल्कि ये अत्याचार भी हैं घरेलू हिंसा के संकेत, हो सकती है जेल

अक्सर लोगों का मानना होता है कि जब कोई परिवार का पुरुष सदस्य महिला के साथ मारपीट आदि करता है तो वो घरेलू हिंसा के अधीन आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि कई ऐसे अत्याचार भी होते हैं, जो आपके भले ही आम लगते हो, लेकिन वो घरेलू हिंसा में शामिल किए जाते हैं।

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : अक्सर लोगों का मानना होता है कि जब कोई परिवार का पुरुष सदस्य महिला के साथ मारपीट आदि करता है तो वो घरेलू हिंसा के अधीन आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि कई ऐसे अत्याचार भी होते हैं, जो आपके भले ही आम लगते हो, लेकिन वो घरेलू हिंसा में शामिल किए जाते हैं। कई रिपोर्ट्स की मानें तो लॉकडाउन में घरेलू हिंसा मामलों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिसकी खबरें आपने इंटरनेट या समाचार-पत्रों पर भी पढ़ा होगा।

आज हम आपको कुछ ऐसे ही कानून के बारे में बताएंगे जिसमें घरेलू हिंसा क्या होती है और महिला के साथ मारपीट ही नहीं, बल्कि कोई भी आपत्तिजनक कृत्य करना भी घरेलू हिंसा में शामिल है। आइए जानते हैं घरेलू हिंसा से जुड़ी खास बातें…

शारीरिक प्रताड़ना

कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ शारीरिक रुप से अत्याचार करता है, जिसमें दर्द, अत्याचार, जान से मारने की धमकी, स्वास्थ्य से जरूरी समस्या करने आदि को शारीरिक प्रताड़ना में शामिल किया जा सकता है।

सेक्शुअल प्रताड़ना

सेक्सुअल प्रताड़ना में किसी महिला के साथ यौन उत्पीड़न आदि करता है तो वो भी घरेलू हिंसा में शामिल है।

बातचीत से प्रताड़ना

बातचीत से होने वाली प्रताड़ना में अपमान, तिरस्कार करना, नाम पुकारना, बेइज्जती करना और लड़का पैदा करने के लिए फोर्स करना आदि शामिल है। किसी भी व्यक्ति को लगातार परेशान करने पर पीड़ित को कोई दिक्कत होती है तो यह घरेलू हिंसा का ही एक हिस्सा है।

आर्थिक प्रताड़ना

आर्थिक प्रताड़ना में सभी या किसी भी आर्थिक या वित्तीय संसाधनों से वंचित करना, कानूनी हक से वंचित रखना, पीड़ित व्यक्ति को आवश्यक सामान की उपलब्धता ना करवाना, संपत्ति, पैसे की मांग करना आदि शामिल है। कोई भी चल या अचल संपति, कीमती सामान, शेयर, बॉन्ड आदि का हस्तांतरण करवाना आदि घरेलू हिंसा का हिस्सा है। कोई भी सुविधा से वंचित रखना भी आर्थिक प्रताड़ना है।

बता दें कि पहले घरेलू हिंसा के मामलों में सिर्फ पुरुषों को ही पार्टी बनाया जा सकता था, लेकिन अब इसमें किसी को भी आरोपी बनाया जा सकता है। इस वजह से घरेलू हिंसा में अब ननद, देवरानी या जेठानी, सास को भी शामिल कर लिया जाता है। जिससे अब इन्हें भी कई मामलों में जेल की सजा काटनी पड़ती है।

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