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नोएडा : काश ESIC कार्ड से फोर्टिस में हो जाता इलाज तो बच जाती महिला की जान

By: RNI Hindi Desk 
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नोएडा : काश ESIC कार्ड से फोर्टिस में हो जाता इलाज तो बच जाती महिला की जान

एक 30 साल की गर्भवती महिला की सिर्फ इसलिए मौत हो जाती है क्यूंकि आठ अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी उसे इलाज़ नहीं मिला।

कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने का दावा करने वाली ESIC का ये हाल है कि ESIC कार्ड होने के बाद भी महिला को इधर से उधर अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े और उसकी मृत्यु हो गयी।

अब हम आपको सिलसिलेवार तरीके से घटनाक्रम बताते है।

सेक्टर 51 स्थित शिवालिक अस्पताल में 31 मई से लेकर चार जून तक वो महिला वहां भर्ती थी और उसकी हालत सीरियस थी और कोरोना पॉजिटिव वो हो सकती थी तो डॉक्टर्स ने उसे किसी अच्छे अस्पताल में क्यों रैफर क्यों नहीं किया।

तब अस्पताल क्या कर रहा था ? और जब महिला को वाकई अस्पताल में इलाज़ की ज़रूरत थी तो उसको भर्ती ना करके उसके साथ एक घिनौना मज़ाक किया गया है। वो महिला जब पूर्ण से स्वस्थ नहीं थीं तो उसे छुट्टी देकर क्यों घर भेज दिया गया ?

मृतका नीलम जो की गर्भवती थी और प्राइवेट नौकरी करती थी वही उनके पास ईएसआईसी कार्ड भी था। 6 तारीख को सुबह जब नीलम की तबियत ख़राब हुई तो उनके पति उन्हें ईएसआईसी अस्पताल ले गए और ईएसआईसी अस्पताल में जब उस महिला को ले जाया गया तो उस महिला को कुछ देर तक ऑक्सीजन दी गयी थी।

लेकिन इलाज़ की सुविधा नहीं है, यह कहकर उसे रैफर कर दिया गया। अब सबसे बड़ी जांच का यह विषय यह है कि ऐसा क्या कारण रहा कि ईएसआईसी अस्पताल ने उस महिला का इलाज नहीं किया !

यहां गौर करने वाली बात यह है कि ईएसआईसी अस्पताल को जब ये पता था कि Ambedkar Multispeciality Hospital सेक्टर 30 में आईसीयू और एनआईसीयू की सुविधा नहीं है तो क्यों उसे वहां रैफर किया गया ?

क्या ईएसआईसी अस्पताल को उस महिला के कोरोना पॉजिटिव होने का डर था जो उन्होनें Ambedkar Multispeciality Hospital सेक्टर 30 में उस रैफर कर दिया।

उस महिला को किसी अच्छे अस्पताल में क्यों नहीं भेजा गया ? क्या अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए उस महिला को ईएसआईसी अस्पताल ने Ambedkar Multispeciality Hospital भेजा ? इस पुरे प्रकरण में गलती ईएसआईसी अस्पताल की है।

Ambedkar Multispeciality Hospital के कर्मचारी से जब उसके पति को पता चला की यहां आईसीयू की सुविधा नहीं है तो वो बाहर से ही उसे फोर्टिस अस्पताल लेकर चला गया।

उसके बाद फोर्टिस अस्पताल ने सिर्फ पैसे का हवाला देकर उस महिला को एडमिट नहीं किया। यह जानते हुए भी कि ईएसआईसी कार्ड से इलाज़ हो सकता है उसे भर्ती नहीं किया गया।

इसके बाद महिला के पति ने जेपी, शारदा अस्पताल और जिम्स में भी उसका इलाज़ करवाने की कोशिश की लेकिन कहीं सफलता हाथ नहीं लगी।

शारदा अस्पताल में हमें कहा गया कि पहले कोविड-19 टेस्ट कराना पड़ेगा। 4500 रूपये टेस्ट के देने के बाद भी जिम्स अस्पताल रेफ़र कर दिया गया। इन सारे अस्पतालों से यह सवाल पूछा जाना चाहिए की उस महिला और उसकी कोख में पल रहे बच्चे की इस ह्त्या का कौन ज़िम्मेदार है ?

डीएम सुहास ने जांच जरूर बिठा दी है लेकिन इस पुरे वाकये ने हाई टेक सिटी कहे जाने वाले नोएडा और उसके अस्पतालों की पोल खोलकर रख दी है।

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