रिपोर्ट: नंदनी तोदी
लखनऊ: यूपी में बीते कुछ सालों से गुंडागर्दी के मामले रफ़्तार पकड़ चुके है। जिसके बाद अब यूपी सरकार ने एक नया कदम उठाया ही ताकि इन वारदातों की गिनती कम हो पाए।
दरअसल, योगी सरकार ने विधानसभा से उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 को मंज़ूरी दे दी है। इसके तहत अब लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में डीसीपी कार्रवाई कर सकेंगे, जो हक़ पहले पुलिस कमिश्नर के पास हुआ करता था।
आपको बता दें, इस संशोधन में मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, गोहत्या, बंधुआ मजदूरी और पशु तस्करी पर कड़ाई होगी। इसके अलावा जाली नोट, नकली दवाओं का व्यापार, अवैध हथियारों का निर्माण और व्यापार, अवैध खनन जैसे अपराधों पर कार्रवाई का प्रावधान है। इस संशोधन के तहत पकड़े गए अपराधियों को आसानी से जमानत नहीं मिल पायेगी। और साथ ही अब अपराधियों की संपत्ति को भी जब्त किया जायेगा। इस नए प्रावधान के तहत पुलिस सभी अपराधियों को 14 दिन के बजाय अब 60 दिन के लिए बंद कर सकती है।
नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस विधेयक के पास होने से पुलिस की मनमानी बढ़ेगी और न्याय नहीं हो सकेगा। उन्होंने आगे कहा कि पहले थाने की पुलिस गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करती थी, जिसकी निगरानी डीएम के पास होती थी। लेकिन अब पुलिस ही गुंडा एक्ट की कार्रवाई करेगी और पुलिस कमिश्नर ही इसकी जांच करेगा। ऐसे में न्याय कहां होगा?
इसके अलावा योगी सरकार ने धरना प्रदर्शन के दौरान उन उपद्रवियों को लेकर एक्ट पास किया है जो प्रदर्शन के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते है और अब उनपर 5000 से लाख तक का जुरमाना लगाया जायेगा।