नई दिल्ली : बरसों बाद मैं बंबई आया, किसी ने याद तो किया… ये वहीं शब्द है जिसे मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने कहा। इस दौरान उन्होंने ऐसे कई बात कहीं, जिसे सुन लोगों की आंखें नम हो गई। उन्होने कहा कि एक उड़ते है पंछी की तरह मैं यहां आता था और चला जाता था, रात-रात भर जगकर मैंने गीत नहीं मैंने अपने खून और कलेजे से लिखा है ये सब कुछ।

दिन भी रात हो गया। मैं जीना चाहता हूं, अच्छी तरह से, लेकिन सबकुछ चला गया। 10 साल बाद संतान पैदा हुई, पहला लड़का। पैदल जाते थे देवी यात्रा पर, साल भर बाद पहला पुरस्कार फिल्म फेयर आवार्ड मिला।
उन्होंने कहा कि हौंसला जीतता है, हथियार नहीं। मेरी टांग भी टूटी, एक नहीं चार-चार बार टूटी, मेरा कलेजा नहीं टूटा। मेरे पास कुछ नहीं, फिर भी बहुत कुछ है। कभी मैंने सोचा था कि मैं अपनी कविता से दुनिया जीत लूंगा, लेकिन कहीं ना कहीं संतोष आनंद गलत था। क्योंकि आज ना मेरे पास पैसा है और ना ताकत।
सुनिये संतोष आनंद की जुबानी
आपको बता दें कि पहली बार संतोष आनंद बरसों बाद इंडियन आइडल के मंच पर नजर आये, जिसके जरिये उन्होंने अपने उन अनछुए किस्सों को सुनाया, जिसे सुनकर मंच पर मौजूद इंडियन आइडल के जज नेहा कक्कड़, हिमेश रेशमियां और विशाल डडलानी मौजूद रहें। इस दौरान मंच पर मौजूद नेहा कक्कड़ ने जहां उनकी मदद की, वहीं विकास डडलानी ने उनके उन गीतों को मांगा, जो उन्होंने लिखा है। क्योंकि उन्होंने इस दौरान कहा था कि वे किसी के कुछ नहीं ले सकते, वे उम्र के इस पड़ाव में भी खुद कमा कर खाते है। और विकास की भी मंशा उनके गीतों के जरिये उनकी मदद करनी की है।