जम्मू-कश्मीर पुलिस में डीएसपी देविंदर सिंह कभी एक जाना पहचाना नाम हुआ करता था। जम्मू-कश्मीर की अलग- अलग सरकारों में उन्हें बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां दी गई थी। एक वक्त था जब पुलिस महकमें में देविंदर सिंह का जलवा हुआ करता था। राज्य की विभिन्न सरकारों से उन्हें प्रमोशन मिला, और तो और उनके ऊपर विदेशी राजनयिकों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मदारियां भी थी। लेकिन 13 जनवरी 2020 को डीएसपी देविंदर सिंह तब सुर्खियों में आए जब वो, दो खूंखार आतंकवादियों के साथ जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में पकड़े गए। कुलगाम में आतंकवादियों के साथ देविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी भी तेज हो गई।
देविंदर सिंह कि गिरफ्तारी के कई दिनों बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया है। राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग करते हुए पीएम से सवाल किया कि, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार इस मामले में चुप क्यों हैं? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यह भी सवाल किया कि पुलवामा हमले में देविंदर सिंह कि क्या भूमिका थी। उन्होंने सवाल किया कि देविंदर सिंह ने 3 आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी जिनके हाथ भारतीय खून से लाल थे। देविंदर सिंह को उस वक्त पकड़ा गया था जब वह आतंकियों को दिल्ली ले जा रहे थे।
राहुल गांधी के बाद देविंदर सिंह को लेकर कांग्रेस के दूसरे नेता भी मोदी सरकार पर हमलावर हो गए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि, जम्मू-कश्मीर में डीएसपी देविंदर सिंह की गिरफ्तारी से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर परेशान करने वाले गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि देविंदर सिंह को जम्मू-कश्मीर में विदेशी राजनयिकों की सुरक्षा जैसी बेहद संवेदनशील जिम्मेदारियां दी गई थी। मौजूदा परिस्थितियों में वह किसके आदेशों पर काम करता था? उसकी पूरी जांच होनी चाहिए। आतंकवादियों को भारत पर हमले की योजना में मदद देना देशद्रोह है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी देविंदर सिंह को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया कि, क्या देविंदर सिंह अकेला काम कर रहा था या और भी उसके साथ थे? उसे किसका समर्थन हासिल था? जम्मू-कश्मीर में इतने संवेदनशील जगह पर उसकी पोस्टिंग थी। उसे क्यों प्रमोट किया गया और इतने समय तक बचाया जाता रहा? क्या वह संसद हमले (2001) और पुलवामा हमले (2019) हमले में शामिल था? प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और एनएसए खमोश क्यों है।
इस पूरे मामले की जांच एनआईए कर रही है जिसपर राहुल गांधी ने आपत्ति भी जताई है। राहुल गांधी ने केंद्र की सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, वह इस मामले पर लीपापोती करने में जुटी है इसके साथ ही राहुल ने एनआईए की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए और कहा कि इस जांच एजेंसी के प्रमुख भी एक ‘मोदी’ ही है। राहुल गांधी ने अब उसी एनआईए पर सवाल उठाया है जिसे कांग्रेस की यूपीए सरकार ने गठित किया था।
13 जनवरी को गिरफ्तारी के बाद देविंदर सिंह ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं और पूछताछ में यह भी पता चला है कि वह लंबे समय से इन आतंकियों के संपर्क में था। यह भी खुलासा हुआ है कि 2018 में भी इन आतंकियों को लेकर वह जम्मू गया था और अपने घर में उन्हें पनाह भी देता था।