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कटनी: जमीन उद्योग विभाग को देने के प्रस्ताव का विरोध, ग्रामीण बोले- नहीं देंगे भूमि, जरूरत पड़ी तो करेंगे आंदोलन

कटनी जिले की रीठी तहसील के सिमरा और देवगांव गांवों में उद्योग विभाग को करीब 450 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का ग्रामीणों ने विरोध किया है। ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वे अपनी जमीन नहीं देंगे और मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन करेंगे।

By: Nivedita 
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कटनी: जमीन उद्योग विभाग को देने के प्रस्ताव का विरोध, ग्रामीण बोले- नहीं देंगे भूमि, जरूरत पड़ी तो करेंगे आंदोलन

कटनी। रीठी तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिमरा और देवगांव में उद्योग विभाग को भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से निवास कर रहे हैं, उसे उद्योग विभाग के नाम किए जाने की प्रक्रिया से उनके घर और आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।

450 एकड़ भूमि के हस्तांतरण का मामला

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 में ग्राम पंचायत सिमरा और देवगांव की करीब 450 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। अब उद्योग विभाग की ओर से इस भूमि को अपने नाम हस्तांतरित करने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस जमीन के दायरे में उनके मकान और आवासीय क्षेत्र भी शामिल हैं, जिसके कारण वे चिंतित हैं।

तहसील कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

भूमि हस्तांतरण के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण रीठी तहसील कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन उद्योग विभाग को नहीं देना चाहते। उनका कहना है कि यह भूमि उनके परिवारों के जीवन-यापन और भविष्य का आधार है।

 

मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निवास वाली भूमि को उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों के साथ कई स्थानीय नेता रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकेश यादव सहित जवाहर यादव, बलिराम चौधरी, कटुआ चौधरी, भागवत, रामरतन, रामलाल, सरमन, त्रिलोक, मंगतराम, धनीराम बर्मन, मुकेश बर्मन, पंकज सेन, संत कुमार और खुशीराम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

प्रशासन के निर्णय पर टिकी नजर

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब ग्रामीणों की आपत्तियों और विरोध के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

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