दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही जिले का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया, जांच और मतदान की तारीख तय हो चुकी है। अब सभी राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 16 जुलाई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद दतिया विधानसभा के नए विधायक की तस्वीर साफ हो जाएगी।
दतिया सीट पर उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण कराया जा रहा है। उन्हें एक पुराने सहकारी ग्रामीण विकास बैंक एफडी मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई थी। दो वर्ष से अधिक की सजा होने के कारण जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत उनकी सदस्यता समाप्त हो गई और सीट रिक्त घोषित की गई। यह मामला वर्ष 1998 में सामने आए सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़े कथित एफडी फर्जीवाड़े से संबंधित था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत के फैसले के आधार पर उपचुनाव की स्थिति बनी।

इस बार दतिया उपचुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं माना जा रहा है। क्षेत्रीय सामाजिक समीकरण भी चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर कुशवाह समाज को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। दतिया क्षेत्र में कुशवाह समाज की मौजूदगी और प्रभाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दल इस वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उम्मीदवार चयन में OBC समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के समीकरण को मजबूत करने के लिए कुशवाह समाज से उम्मीदवार उतारने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके अलावा पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती के परिवार से पत्नी या बेटे को चुनाव मैदान में उतारने की संभावनाओं की भी चर्चा चल रही है। कांग्रेस के सामने अपनी सीट बचाने की बड़ी चुनौती है।

भाजपा के लिए दतिया उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी इस सीट को दोबारा हासिल करने की कोशिश में जुटी है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। पार्टी इस चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।
इस उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी भी अपनी भूमिका तलाश रही है। पार्टी की ओर से दामोदर यादव का नाम संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में है। यदि पार्टी मजबूत प्रदर्शन करती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
दतिया विधानसभा में यह पहला उपचुनाव है, इसलिए इसका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है। भाजपा के लिए यह खोई हुई सीट वापस पाने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस के लिए अपनी जीत को बरकरार रखने की परीक्षा। अब सभी की निगाहें राजनीतिक दलों की उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं। टिकट वितरण के बाद ही स्पष्ट होगा कि चुनाव विकास, नेतृत्व, सहानुभूति या सामाजिक समीकरणों में से किस मुद्दे के इर्द-गिर्द आगे बढ़ेगा। 30 जुलाई का मतदान और 3 अगस्त का परिणाम दतिया के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।