मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गोंडवाना काल की जल संरचनाएं उस साम्राज्य की दूरदर्शी सोच, प्रकृति प्रेम और लोककल्याणकारी नीतियों का जीवंत प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ जबलपुर स्थित ऐतिहासिक जल मंदिर और वीर बावड़ी परिसर का भ्रमण कर चल रहे पुनरुद्धार कार्यों का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये जल संरचनाएं केवल पानी संग्रह के साधन नहीं हैं, बल्कि गोंडवाना साम्राज्य के गौरवशाली अतीत, उन्नत तकनीक और सामाजिक सरोकारों की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि उस काल में जल संरक्षण को लेकर जो वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक अपनाई गई थी, वह आज भी प्रासंगिक है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने वीरांगना रानी दुर्गावती के दूरदर्शी विजन की सराहना करते हुए कहा कि रानी ताल और चेरी ताल के मध्य स्थित यह वीर बावड़ी उनके प्रकृति प्रेम और जनकल्याण की सोच का प्रतीक है। यह बावड़ी गोंडवाना कालीन स्थापत्य का बेजोड़ नमूना मानी जाती है।

अवलोकन के दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने परियोजना से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल मंदिर और वीर बावड़ी के पुनरुद्धार कार्यों में मूल स्थापत्य की पहचान और ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। ऐसे प्रयास न केवल विरासत को सहेजने में सहायक होंगे, बल्कि पर्यटन और स्थानीय पहचान को भी नई दिशा देंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल मंदिर और वीर बावड़ी जैसी संरचनाएं हमें अपने इतिहास से जोड़ती हैं और यह बताती हैं कि जल संरक्षण भारतीय संस्कृति की मूल भावना का हिस्सा रहा है। इन धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अवसर पर अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी स्थल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी साझा की। गोंडवाना साम्राज्य की यह विरासत आज भी अपनी भव्यता और उपयोगिता के साथ इतिहास की सजीव गवाही दे रही है।